October 29, 2026

आधुनिक विद्युत चाक से जयराम कुम्भकार के हुनर को मिली नई पहचान, स्वरोजगार को मिला नया आधार

रायपुर :  आधुनिक विद्युत चाक से जयराम कुम्भकार के हुनर को मिली नई पहचान, स्वरोजगार को मिला नया आधार मिट्टी को आकार देकर सुंदर बर्तन बनाने का हुनर पीढ़ियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारंपरिक कला का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। अब यही हुनर आधुनिक तकनीक का साथ पाकर कारीगरों की आजीविका को नई मजबूती दे रहा है। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के मोहला विकासखंड अंतर्गत ग्राम गोटाटोला निवासी जयराम कुम्भकार इसकी प्रेरक मिसाल हैं। छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड के माध्यम से मिले आधुनिक विद्युत चाक ने उनके पुश्तैनी व्यवसाय को नई गति दी है। इससे न केवल मिट्टी के बर्तन बनाने का काम आसान हुआ है, बल्कि उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ आर्थिक स्थिति में सुधार की नई संभावनाएं भी बनी हैं।

आधुनिक विद्युत चाक से जयराम कुम्भकार के हुनर को मिली नई पहचान, स्वरोजगार को मिला नया आधार

    जयराम कुम्भकार वर्षों से मिट्टी के बर्तन एवं अन्य उपयोगी सामग्री बनाने के पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। पहले हाथ से संचालित चाक पर बर्तन तैयार करने में काफी समय और शारीरिक श्रम लगता था। सीमित संसाधनों के कारण उत्पादन भी अपेक्षाकृत कम हो पाता था। लेकिन छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड से आधुनिक विद्युत चाक मिलने के बाद उनके काम करने के तरीके में सकारात्मक बदलाव आया है। अब वे कम समय और कम मेहनत में अधिक बर्तन तैयार कर पा रहे हैं। इससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ी है और व्यवसाय को आगे बढ़ाने का नया अवसर मिला है।

*मिट्टी के हुनर को मिला तकनीक का साथ*

    आधुनिक विद्युत चाक ने जयराम कुम्भकार के लिए बर्तन निर्माण की प्रक्रिया को अधिक सरल और सुविधाजनक बना दिया है। पहले जिस काम में अधिक समय और मेहनत लगती थी, अब वही काम अपेक्षाकृत कम समय में पूरा हो रहा है। उत्पादन क्षमता बढ़ने से वे अपने व्यवसाय को बेहतर ढंग से संचालित कर पा रहे हैं। इससे परिवार की आजीविका को मजबूती मिलने के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी सकारात्मक बदलाव आ रहा है।

*जयराम कुम्भकार ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का जताया आभार*

    जयराम कुम्भकार ने आधुनिक विद्युत चाक उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि विद्युत चाक मिलने से उनके रोजमर्रा के काम में काफी सहूलियत हुई है। पहले मिट्टी के बर्तन बनाने में अधिक मेहनत और समय लगता था, लेकिन अब कम समय में अधिक बर्तन तैयार हो रहे हैं। उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि इस सुविधा से उनका पारंपरिक व्यवसाय आगे बढ़ रहा है और परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है।

*पारंपरिक कला के संरक्षण के साथ ग्रामीण आत्मनिर्भरता को बढ़ावा*

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा पारंपरिक कला और ग्रामीण कारीगरों के स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड के माध्यम से कारीगरों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने की पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे पारंपरिक माटीकला के संरक्षण और संवर्धन के साथ कारीगरों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने तथा उनकी आजीविका को सुदृढ़ बनाने में सहायता मिल रही है।