नई दिल्ली। देश में ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन की मांग को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा है कि भारत की तुलना न तो बांग्लादेश से की जा सकती है और न ही फ्रांस से। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष हिंसा का समर्थन बिल्कुल नहीं करता और उसका एकमात्र उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करना है, न कि सरकार को गिराना।
रिजिजू के आरोप और थरूर की सफाई
इस राजनीतिक विवाद की शुरुआत तब हुई जब मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर कुछ विपक्षी नेताओं और जेएनयू छात्र कार्यकर्ता नेहा बोरा के वीडियो साझा करते हुए यह आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल और भारत-विरोधी तत्व युवाओं को भड़काकर देश में बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके जवाब में शशि थरूर ने कहा कि फ्रांस या अन्य देशों की तरह भारत में हिंसा या अराजकता स्वीकार्य नहीं है, और विपक्ष केवल शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और स्वतंत्र चुनाव की मांग कर रहा है।
मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर टकराव
यह पूरा विवाद मुख्य रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच शुरू हुआ है। विपक्ष का गंभीर आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान सोची-समझी साजिश के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। शशि थरूर ने इसे एक बड़ा संवैधानिक मुद्दा बताते हुए चुनाव आयोग से पूरी तरह निष्पक्ष होकर काम करने की मांग की है, हालांकि चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

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