October 20, 2026

संसद सत्रावसान में देरी पर विवाद, किरेन रिजिजू ने दी सफाई

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान न किए जाने को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सियासी तकरार बढ़ गई है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के पत्र के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया है कि संविधान में सत्रावसान के लिए कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं है, इसलिए सत्र समाप्त होने के बाद इसमें देरी होना असंवैधानिक नहीं है।

खड़गे की आपत्ति और रिजिजू का जवाब

संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त 2026 को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ था। इसके 64 दिन बीत जाने के बाद भी औपचारिक सत्रावसान न होने पर खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कड़ा ऐतराज जताया था और परिसीमन के प्रस्ताव पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। इसके जवाब में रिजिजू ने साल 2008 में 87 दिन, 1987 में 76 दिन और 2013 में 49 दिन बाद सत्रावसान होने के पुराने उदाहरण दिए।

परिसीमन और विधायी कामकाज पर जोर

संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि सरकार परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयकों पर आम सहमति बनाने के लिए कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों से संपर्क साध रही है। उन्होंने विपक्ष से अपील की है कि वे देशहित में महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में सरकार का सहयोग करें।