वाशिंगटन। संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से अलग-थलग करने के लिए एक बड़ा आर्थिक अभियान शुरू किया है। अमरीकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के अनुसार, "ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट" का मकसद ईरान के वैश्विक वित्तीय एवं व्यापारिक संपर्कों को पूरी तरह समाप्त करना है, ताकि तेहरान को आर्थिक रूप से पंगु बनाया जा सके। दूसरी ओर, इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह इस प्रकार के दबाव से निपटने के लिए पूर्णतः तैयार है। ईरान के अर्थशास्त्र मंत्री अली मदनीजादेह ने कहा कि उनके पास प्रतिबंधों के असर को बेअसर करने की दो साल की विस्तृत रणनीति मौजूद है और अमरीका को इस मोर्चे पर भी विफलता ही हाथ लगेगी।
वैश्विक वित्तीय तंत्र और 60 से अधिक संस्थाओं पर कसता शिकंजा
यह नई लड़ाई पारंपरिक हथियारों के बजाय बैंकों, बंदरगाहों, क्रिप्टो वॉलेट्स और बहुराष्ट्रीय परिसंपत्तियों के माध्यम से लड़ी जा रही है। अमरीका ने डिजिटल एसेट्स, शिपिंग, एविएशन, गोल्ड और टेक्नोलॉजी जैसे प्रमुख क्षेत्रों से जुड़ी 60 से अधिक संस्थाओं, जहाजों और व्यक्तियों को प्रतिबंधित सूची में डाला है। ये संस्थाएं चीन, हांगकांग, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और यूरोपीय देशों तक फैली हुई हैं। इसके साथ ही, द्वितीयक प्रतिबंधों (सेकेंडरी सेंक्शंस) का प्रावधान लागू कर अमरीका ने चेतावनी दी है कि ईरान के साथ कारोबार जारी रखने वाले किसी भी विदेशी बैंक या कंपनी को अमरीकी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
ईरानी अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव और घरेलू चुनौतियां
यदि ये कड़े द्वितीयक प्रतिबंध पूरी तरह लागू होते हैं, तो ईरान के तेल राजस्व में भारी गिरावट आने की आशंका है। एविएशन और मर्चेंट शिपिंग प्रभावित होने से आम नागरिकों के लिए दैनिक वस्तुओं की दरें बढ़ सकती हैं। पिछले छह महीनों के सैन्य तनाव और क्षेत्रीय मोर्चों पर खर्च के कारण ईरान का खजाना पहले ही दबाव में है। यदि विदेशी मुद्रा की आवक में कमी आती है, तो देश में मुद्रास्फीति और बेरोजगारी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
प्रतिबंधों का दायरा और आने वाले समय की परीक्षा
यद्यपि ईरान लंबे समय से अमरीकी पाबंदियों के बीच अपनी अर्थव्यवस्था चलाने का अनुभव रखता है और उसने चीन जैसे साझेदारों, क्रिप्टो वॉलेट्स व सोने के जरिए व्यापार जारी रखा है, लेकिन इस बार प्रतिबंधों की व्यापकता पहले से कहीं अधिक है। वैश्विक कंपनियों द्वारा अमरीकी दंडात्मक कार्रवाई के डर से दूरी बनाने की संभावना है। ऐसे में ईरान का दो साल का ब्लू प्रिंट कितना कारगर सिद्ध होता है, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट हो जाएगा।

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