जोधपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान बी.एससी. एग्रीकल्चर कोर्स की काउंसिलिंग प्रक्रिया में प्रवेश की अनुमति मांग रहे निजी कृषि महाविद्यालयों की सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत के इस कड़े आदेश के बाद अब काउंसिलिंग प्रक्रिया में सिर्फ वही कॉलेज भाग ले पाएंगे जो सभी तय नियमों और मानकों का पूरी तरह से पालन कर रहे हैं।
शिक्षा की गुणवत्ता पर सख्त रुख
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति डॉ. नूपुर भाटी की खंडपीठ द्वारा की गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने दो टूक कहा कि शिक्षा के गिरते स्तर और तय मानकों की अनदेखी को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत के इस सख्त निर्णय से उन सभी प्राइवेट संस्थानों को तगड़ा झटका लगा है जो बुनियादी मापदंडों को ताक पर रखकर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे थे। याचिका लगाने वाले संस्थानों में एस.के.डी. एग्रीकल्चर कॉलेज और श्री विनय कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर सहित कई अन्य कॉलेज शामिल थे, जिन्होंने कृषि विभाग के आदेश को कोर्ट में चुनौती दी थी।
कृषि विभाग ने बढ़ाई एनओसी से इंकार
मूल रूप से कृषि विभाग ने अपने आदेश में इन निजी कॉलेजों की एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) की समय-सीमा आगे बढ़ाने से स्पष्ट मना कर दिया था। विभाग ने यह तर्क दिया था कि ये कॉलेज भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तय मानदंडों, योग्य शिक्षक वर्ग की नियुक्ति, बैंक खातों के जरिए वेतन देने, पीएफ कटौती और बायोमीट्रिक अटेंडेंस जैसे जरूरी नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इन्हीं अनिवार्य शर्तों की अवहेलना के कारण विभाग ने एनओसी का नवीनीकरण करने से इंकार किया था।
नियमों की अनदेखी पर अदालत की दो-टूक
याचिकाकर्ता कॉलेजों की तरफ से अदालत में दलील दी गई थी कि नीति के नियमों के अनुसार उन्हें एक्रीडेशन हासिल करने के लिए छह साल की अवधि मिली हुई है, इसलिए उनकी एनओसी को रद्द नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने निजी संस्थानों की इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया। उच्च न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में साफ किया कि एक्रीडेशन के लिए समय मिलने का कतई यह अर्थ नहीं है कि संस्थान तय नियमों की धज्जियां उड़ाना शुरू कर दें।

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