वाशिंगटन। संयुक्त राज्य अमेरिका ने सीरिया को आतंकवाद के प्रायोजक देशों की सूची (स्टेट स्पॉन्सर ऑफ टेररिज्म) से बाहर कर दिया है। ट्रंप प्रशासन का यह कदम सीरियाई राष्ट्र के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। इस निर्णय से देश पर वर्षों से लागू कड़े आर्थिक एवं व्यावसायिक प्रतिबंधों में ढील मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा, साथ ही अमेरिकी सैन्य सहायता मिलने की संभावनाएं भी बढ़ जाएंगी। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अनुसार, यह फैसला सीरियाई जनता के लिए आर्थिक प्रगति और एक बेहतर भविष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम सिद्ध होगा।
एचटीएस को वैश्विक आतंकी सूची से हटाया, राष्ट्रपति अल-शरा को सीधा लाभ
अमेरिकी प्रशासन ने इसके साथ ही अल-शरा के संगठन 'हयात तहरीर अल-शाम' (HTS) को भी 'स्पेशली डेजिग्नेटेड ग्लोबल टेररिस्ट' की श्रेणी से निष्कासित कर दिया है। इस फैसले का सीधा लाभ सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा को प्राप्त होगा, जो पूर्व में एचटीएस के प्रमुख थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले कुछ समय से अल-शरा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते रहे हैं और उनके साथ बैठक भी कर चुके हैं।
1979 से लागू पाबंदियों का अंत और आतंकवाद विरोधी कार्रवाई
उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने वर्ष 1979 में सीरिया को आतंकवाद प्रायोजित करने वाले राष्ट्रों की सूची में सम्मिलित किया था, जिसके उपरांत दशकों तक सीरिया विभिन्न आर्थिक प्रतिबंधों से घिरा रहा। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि शरा सरकार ने आईएसआईएस और अल-कायदा जैसे आतंकी नेटवर्कों के विरुद्ध निरंतर प्रभावी अभियान चलाए हैं। इस नए निर्णय से सीरिया में विदेशी निवेश के द्वार खुलेंगे और निजी कंपनियों की भागीदारी आसान होगी।
पश्चिम एशिया नीति में बड़ा बदलाव और क्षेत्रीय समीकरण
अमेरिका का मानना है कि इस कदम से सीरिया की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और उसे वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में पुनः जोड़ने में सहायता मिलेगी। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब हाल ही में इजराइल द्वारा सीरिया के अबू अल-दुहूर एयरबेस पर किए गए हमले के बाद से क्षेत्रीय तनाव गहराया हुआ है। ऐसे परिवेश में अमेरिका द्वारा सीरिया को दी गई यह राहत पश्चिम एशिया से जुड़ी उसकी विदेश नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देती है।

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