नई दिल्ली: भारतीय रेल (Indian Railways) की प्रीमियम ट्रेन्स में शुमार है वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat), राजधानी एक्सप्रेस (Rajdhani Express), शताब्दी एक्सप्रेस (Shatabdi Express) और दूरंतो एक्सप्रेस (Duranto Express)। इन ट्रेनों में टिकट कटाने के समय ही चाय-नाश्ता और भोजन (Meal) के पैसे ले लिए जाते हैं। लेकिन जबसे इन ट्रेनों में कैटरिंग को नहीं चुनने का ऑप्शन आया, तब से भोजन नहीं चुनने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह स्वीकारोक्ति खुद आईआरसीटीसी IRCTC की तरफ से आई है।
टिकट के साथ मील बुक नहीं कराने वाले बढ़ रहे हैं
रेल मंत्रालय की पीएसयू इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन IRCTC ने पिछले सप्ताह ही चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही का परिणाम जारी किया है। इस अवसर पर अर्निंग कॉल के दौरान कैटरिंग से जुड़ा एक सवाल आया। इस वाल पर कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राहुल हिमालयन ने बताया कि IRCTC के माध्यम से टिकट बुक करने वाले रेल यात्रियों में भोजन का चुनाव नहीं करने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ रही है। हालांकि, लोग क्यों भोजन का ऑप्शन नहीं चुन रहे हैं, इसका उन्होंने कोई सही-सही कारण नहीं बताया। उल्लेखनीय है ट्रेन में भोजन की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी आईआरसीटीसी की ही है।
30% तक पैसेंजर नहीं चुनते हैं भोजन
इस कॉन कॉल के दौरान आए एक सवाल पर हिमालयन ने बताया कि ट्रेन में ऑप्ट-आउट (भोजन का) लगभग "15% से 30%" के बीच है। बाद में उन्होंने सुधारते हुए कहा कि यह 25 से 30% तक हो सकता है। इसे बाद में वेरीफाई करने की भी उन्होंने बात की। उनका कहना थाट ऑप्ट-आउट के लिए मैं जो आकस्मिक आंकड़ा दे रहा हूं, इस संख्या की स्वतंत्र रूप से जांच नहीं की गई है।
भोजन की गुणवत्ता है वजह
पहले जब ये ट्रेनें चली थीं तो भोजन की गुणवत्ता बेहतर हुआ करती थीं। तब टिकट के साथ भोजन लेना अनिवार्य था और उसके चार्ज भी टिकट में ही जुड़ा हुआ था। लेकिन जब इस बारे में शिकायत बढ़ी तो रेलवे बोर्ड ने भोजन को नहीं चुनने की आजादी दी। कुछ यात्रियों ने तब भोजन के ऑप्शन को न चुनना ही बेहतर समझा। अब इस ट्रेंड में बढ़ावा हो रहा है। लेकिन आईआरसीटीसी का कहना है कि गुणवत्ता ही एक वजह नहीं है। अब लोगों को कुछ ज्यादा च्वाइस भी मिल रहा है। वे ऑनलाइन कैटरर्स से भी भोजन मंगवा रहे हैं।
शिकायत पर क्या कहा
हिमालयन का कहना है कि आईआरसीटीसी हर साल करीब 58 करोड़ मील सर्व करता है। मतलब हर रोज करीब 18 लाख मील। इनमें से आन रिकार्ड 300 से 500 मामलों में ही शिकायत मिलती है जबकि हकीकत में प्रतिदिन 2000 से अधिक शिकायतें आती है। आन रिकार्ड लगभग 0.0008% की दर है शिकायतों की। उन्होंने कहा कि कई शिकायतें खाने की गुणवत्ता के बारे में भी नहीं होतीं, बल्कि अतिरिक्त पानी या बेबी फूड जैसी मांगों या स्टाफ के व्यवहार पर प्रतिक्रिया से संबंधित भी होती हैं। कई प्रमाण है कि अधिकतर शिकायतें गुणवत्ता की होती हैं परंतु अधिकारी उन पर लीपा पोती कर देते हैं।
ओवरचार्जिंग से बचने के लिए ई-पैंट्री
उन्होंने बताया कि यात्री अनुभव को बेहतर बनाने के नया ई-पैन्ट्री मॉडल आया है। इसे 50 से अधिक ट्रेनों में लागू किया जा चुका है। जल्दी ही इसे करीब 100 ट्रेनों तक बढ़ाया जाएगा। ई-पैन्ट्री योजना के तहत, यात्री उसी ट्रेन पर मौजूद पेंट्री कांट्रेक्टर से मोबाइल ऐप या QR कोड के जरिए भोजन ऑर्डर कर सकते हैं। यह सिस्टम ओवरचार्जिंग से बचाने के लिए डिजाइन किया गया है।

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