झांसी: 'पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया' और 'सबका साथ, सबका विकास' जैसे बड़े-बड़े नारे जब धरातल पर उतरकर उत्तर प्रदेश के झांसी जिले की मऊरानीपुर तहसील में पहुंचते हैं, तो वे दुडेरी नदी के उफनते पानी में पूरी तरह दम तोड़ते नजर आते हैं। यहाँ के खदरका गांव में बरसात के मौसम में बच्चों का स्कूल जाना शिक्षा हासिल करने जैसा नहीं, बल्कि रोज 'मौत के मुंह में छलांग लगाने' जैसा खतरनाक अनुभव बन चुका है।
जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल
एक तरफ जहां देश का भविष्य कहे जाने वाले छोटे-छोटे बच्चे और छात्राएं रोजाना अपनी जान हथेली पर रखकर उफनती नदी को पार करने को विवश हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक व्यवस्था गहरी नींद में सोई हुई है। यह गंभीर सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या प्रशासन की नींद तब खुलेगी जब कोई मासूम इस तेज बहाव की आगोश में समा जाएगा?
क्या है पूरा मामला?
झांसी जिले के मऊरानीपुर तहसील अंतर्गत खदरका गांव के पास से दुडेरी नदी बहती है। मानसून के दिनों में यह नदी विकराल रूप धारण कर लेती है। शंकरलाल माध्यमिक विद्यालय (खनुआ) और खदरका को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित नदी का रपटा उफनते पानी में पूरी तरह डूब जाता है, जिससे आवागमन का संपर्क पूरी तरह कट जाता है। इसके बावजूद ज्ञान अर्जन की ललक में छोटे स्कूली बच्चे, बालिकाएं और शिक्षकगण इस जानलेवा रपटे से गुजरने के लिए मजबूर हैं।
खौफ के साए में रहते हैं अभिभावक
नदी में पानी का वेग इतना खतरनाक होता है कि जरा सी असावधानी किसी की भी जान ले सकती है। जब तक स्कूल गए बच्चे सकुशल अपने घर वापस नहीं लौट आते, तब तक उनके माता-पिता की सांसे अटकी रहती हैं और उन्हें हर पल किसी बड़े हादसे का डर सताता रहता है। यह कोई एक-दो दिन की समस्या नहीं है, बल्कि हर बरसात के सीजन में इस क्षेत्र के लोगों को इस शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना को झेलना पड़ता है।
पुल निर्माण की उठी पुरजोर मांग
इस गंभीर खतरे से निजात पाने के लिए शिक्षक मनोज गुप्ता, शिवचरण, अमर सिंह, रामप्रसाद सेन, रवि राजपूत, रविंद्र सिंह और सुरेंद्र राजपूत सहित क्षेत्र के तमाम ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने दुडेरी नदी के इस डूबने वाले रपटे पर जल्द से जल्द एक ऊंचे और पक्के पुल के निर्माण की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को किसी अप्रिय घटना या बड़े हादसे के होने का इंतजार नहीं करना चाहिए और बच्चों की सुरक्षा के लिए तत्काल प्रभाव से सुरक्षित रास्ते का इंतजाम किया जाना चाहिए।

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