नई दिल्ली। संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रगति के परिप्रेक्ष्य में नई दिल्ली और वाशिंगटन के कूटनीतिक रिश्तों को लेकर कयासों का दौर आरंभ हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के पूर्व सलाहकार अजय जैन भुटोरिया ने विश्वास प्रकट किया है कि यदि अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट्स पूर्ण बहुमत प्राप्त कर लेते हैं, तो इससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में अधिक मजबूती और निरंतरता देखने को मिलेगी। उनके विचारों के अनुसार, इससे द्विपक्षीय नीतियां व्यक्तिगत बयानों अथवा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की टिप्पणियों के बजाय पूरी तरह संस्थागत तथा नियमों के दायरे में संचालित होंगी।
भारत और अमेरिका के संबंधों पर संभावित प्रभाव
यदि अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेटिक पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलता है, तो भारत पर पड़ने वाले प्रभावों के संदर्भ में भुटोरिया का मत है कि इससे दोनों लोकतांत्रिक देशों की साझेदारी में स्थिरता और पारदर्शिता आएगी। उन्होंने रेखांकित किया कि डेमोक्रेट्स ने सदैव दोनों राष्ट्रों के बीच सुदृढ़ संबंधों का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने यह आशा व्यक्त की कि कांग्रेस में पार्टी की स्थिति सुदृढ़ होने से भारत के प्रति अमेरिकी नीतियां अधिक स्थायी और नियमानुकूल बन सकेंगी।
पूर्ववर्ती ट्रंप प्रशासन के कार्यकाल की शुल्क नीतियों का हवाला देते हुए भुटोरिया ने स्पष्ट किया कि एक ही दिन में भारी-भरकम कर दरों की घोषणा और अगले ही दिन उनमें बदलाव जैसे अप्रत्याशित निर्णयों के स्थान पर अब नीतियां अधिक विधिवत और संस्थागत माध्यमों से आकार लेंगी। भुटोरिया ने ऐसी कार्यप्रणाली की उम्मीद जताई है जिसमें भारत-अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी को प्रगाढ़ करने के लिए स्थिर, नियम-बद्ध और विधायी सहभागिता वाली नीति को अपनाया जाए।
अजय जैन भुटोरिया ने आगे उल्लेख किया कि डेमोक्रेटिक पार्टी न्यायसंगत आप्रवासन नीतियों तथा आम जनजीवन के खर्चों को नियंत्रित करने वाले एजेंडे के प्रति प्रतिबद्ध है। इस दृष्टिकोण से अमेरिका में कार्यरत भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों, पेशेवरों तथा उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकेगा, जो अक्सर कड़े और जटिल वीजा प्रावधानों की अनिश्चितता के बीच जीवन व्यतीत करते हैं।
ट्रंप प्रशासन के निर्णयों पर कढ़ी निगरानी
अमेरिकी संविधान के प्रावधानों के अनुसार, राजकोषीय बजट, सरकारी व्यय अथवा व्यापारिक संधियों से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कराने के लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की स्वीकृति अनिवार्य होती है। भुटोरिया ने बताया कि सदन में डेमोक्रेट्स का बहुमत होने से वर्तमान प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नियंत्रण और पारदर्शिता बढ़ेगी। उन्होंने संकेत दिया कि प्रशासन के नीतिगत फैसलों, वित्तीय व्यय और कथित अनियमितताओं की अब सूक्ष्मता से समीक्षा की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि अब अमेरिकी प्रशासन विधायी संवीक्षा के बिना स्वेच्छा से कोई वित्तीय निर्णय नहीं ले पाएगा, न ही बजट राशि में मनमाने ढंग से कटौती कर सकेगा और न ही विदेशी सैन्य हस्तक्षेपों को अपनी इच्छा से आगे बढ़ा सकेगा। प्रत्येक नीतिगत दस्तावेज को संसद की विधिक जांच से गुजरना होगा और दोनों दलों के बीच व्यापक विमर्श होगा। इससे भारत जैसे वैश्विक साझीदारों को विदेश नीति में होने वाले अचानक और अप्रत्याशित बदलावों से एक प्रकार का रणनीतिक सुरक्षा कवच प्राप्त होगा।
पिया डंडिया की विजय को बताया दीवाली का उपहार
अमेरिकी संसद में भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों के बढ़ते प्रतिनिधित्व पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए भुटोरिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से पिया डंडिया की जीत को एक युगांतकारी घटना करार दिया। उन्होंने कहा कि यह सफलता संपूर्ण भारतीय-अमेरिकी बिरादरी के लिए अत्यंत गौरव का विषय है और यह दीवाली के पावन पर्व पर एक सौगात के समान है। उन्होंने एरिजोना से चुनावी मैदान में उतरे डॉ. अमीश शाह की संभावित विजय को लेकर भी सकारात्मक उम्मीद जताई। कैलिफोर्निया समेत अन्य क्षेत्रों के परिणामों को लेकर भुटोरिया ने यह विश्वास जताया कि ये चुनाव अमेरिकी आंतरिक राजनीति और वैश्विक कूटनीति को नया आयाम प्रदान करेंगे।
दो सौ चालीस सीटों के साथ डेमोक्रेट्स की बढ़त
अजय जैन भुटोरिया ने मध्यावधि चुनावों के शुरुआती रुझानों और परिणामों को डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए एक ऐतिहासिक सफलता बताया। उनके अनुसार देश भर में एक प्रबल 'ब्लू वेव' का प्रभाव दिखाई दे रहा है। भुटोरिया के आंकलन के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में लगभग 240 सीटों के साथ मजबूत बहुमत हासिल करने के मार्ग पर अग्रसर है। इसके अतिरिक्त, इस बात की भी प्रबल संभावना है कि यह दल 52-48 के बहुमत समीकरण के साथ सीनेट पर भी अपना आधिपत्य स्थापित कर लेगा।

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