कोलकाता: कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि बागी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायक ऋतब्रत बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा में फिलहाल नेता प्रतिपक्ष के पद पर बने रहेंगे। यह अंतरिम व्यवस्था तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक हाईकोर्ट की एकल पीठ उनकी इस नियुक्ति को चुनौती देने वाली मुख्य याचिका पर अपना अंतिम निर्णय नहीं सुना देती। न्यायमूर्ति शंपा सरकार और न्यायमूर्ति अजय कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया है।
किसने दी है ऋतब्रत बनर्जी की नियुक्ति को चुनौती?
टीएमसी के ममता बनर्जी खेमे के वरिष्ठ विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जिसके तहत ऋतब्रत बनर्जी को सदन में नेता प्रतिपक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था। डिवीजन बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एकल पीठ को यह निर्देश दिया है कि वह शोभनदेब चट्टोपाध्याय की याचिका पर प्राथमिकता से सुनवाई करे और आगामी दो महीनों के भीतर इस मामले का निष्पादन (निपटारा) सुनिश्चित करे।
पहले एकल पीठ ने खारिज कर दिया था अंतरिम राहत का अनुरोध
इससे पूर्व, कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ ने बीते 18 जून को विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस द्वारा ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के निर्णय पर किसी भी प्रकार की अंतरिम रोक लगाने या राहत देने से इनकार कर दिया था। एकल पीठ के इसी फैसले से असंतुष्ट होकर विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने खंडपीठ (डिवीजन बेंच) का दरवाजा खटखटाया था।
याचिकाकर्ता चट्टोपाध्याय ने अपनी याचिका में उनके नाम को दरकिनार किए जाने और बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपे जाने की पूरी प्रक्रिया को चुनौती दी है। बहरहाल, डिवीजन बेंच के ताजा निर्देशों के बाद अब यह तय हो गया है कि जब तक एकल पीठ इस मामले में अंतिम फैसला नहीं सुनाती, तब तक ऋतब्रत बनर्जी इस पद पर बरकरार रहेंगे।

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