अहमदाबाद: देश में साइबर ठगी करने वाले शातिर अपराधियों ने अब कंपनियों के बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को चूना लगाने के लिए ठगी का एक बिल्कुल नया और खतरनाक तरीका ढूंढ निकाला है, जिसे 'बॉस स्कैम' या 'सीईओ इंपर्सोनेशन फ्रॉड' (CEO Impersonation Fraud) कहा जा रहा है। इस अनोखे फ्रॉड में ठग किसी कंपनी के मालिक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) या निदेशक की फर्जी डिजिटल पहचान बनाकर कर्मचारियों को तत्काल पैसे ट्रांसफर करने का आदेश देते हैं। अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने इसी तर्ज पर हुई एक बड़ी ठगी की गहराई से जांच करते हुए चीन, पाकिस्तान, भारत और हांगकांग तक फैले एक अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क का खुलासा किया है। इस मामले की तहकीकात के दौरान पश्चिम बंगाल से दो ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो कथित तौर पर इन साइबर ठगों को फर्जी सिम कार्ड, मोबाइल नंबर और व्हाट्सऐप अकाउंट मुहैया कराते थे। पुलिस का दावा है कि इन गिरफ्तार आरोपियों के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों में करीब 4,500 फर्जी सिम कार्ड साइबर अपराधियों तक पहुँचाए गए थे, और इनसे जुड़े देश के 26 अलग-अलग राज्यों में लगभग 252 गंभीर साइबर अपराध के मामले दर्ज पाए गए हैं।
व्हाट्सऐप पर जिप फाइल भेजकर कंपनी के मालिक के नाम पर की डेढ़ करोड़ की ठगी
अहमदाबाद के एक प्रमुख व्यवसायी को इसी अत्याधुनिक तकनीक का शिकार बनाकर करीब 1.5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम ठगी को अंजाम दिया गया। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गत 23 जून को उस कारोबारी के पर्सनल मोबाइल नंबर पर व्हाट्सऐप के जरिए एक 'जिप' (ZIP) फाइल भेजी गई थी। उस फाइल में कंपनी के बैंक खाते से कोई 'असामान्य लेनदेन' होने का दावा किया गया था और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के रिस्क कंट्रोल डिपार्टमेंट की तरफ से कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।
शुरुआत में ठगों ने खुद को आरबीआई का अधिकारी बताया, और इसके तुरंत बाद उन्होंने कंपनी के असली मालिक या उच्चाधिकारी की हूबहू नकली डिजिटल पहचान का इस्तेमाल करते हुए कंपनी के मुख्य अकाउंटेंट को निर्देश दिया कि वह तत्काल बताए गए बैंक खाते में 1.5 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दे। जब इस शातिर ठगी का खुलासा हुआ, तो पीड़ित कारोबारी ने तुरंत साइबर क्राइम की राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस की मुस्तैदी और त्वरित तकनीकी कार्रवाई के चलते ठगी गई कुल रकम में से 1.13 करोड़ रुपये की राशि को होल्ड कराकर सुरक्षित वापस बरामद कर लिया गया है।
किस तरह काम करता है खतरनाक 'बॉस स्कैम'?
पुलिस की तकनीकी जांच में यह बात सामने आई है कि ये साइबर ठग सबसे पहले कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों या कर्मचारियों को व्हाट्सऐप पर एक जिप फाइल भेजते हैं। इस फाइल के भीतर खतरनाक मैलवेयर से जुड़ी '.exe' और '.dll' फाइलें छिपी होती हैं। यदि कोई कर्मचारी उत्सुकतावश या अनजाने में इस फाइल को खोल लेता है, तो उसके कंप्यूटर सिस्टम या व्हाट्सऐप सेशन का पूरा रिमोट एक्सेस इन साइबर अपराधियों के हाथों में चला जाता है।
इसके बाद ठग कंपनी के सीईओ, मालिक या डायरेक्टर की फर्जी प्रोफाइल का उपयोग करके कर्मचारियों से सीधे संपर्क साधते हैं। वे ऐसे हालात पैदा करते हैं जिससे कर्मचारी को लगे कि मामला बेहद गोपनीय और अर्जेंट है, और वे तत्काल भुगतान करने या किसी नए बैंक खाते में पैसे भेजने का निर्देश देते हैं। मातहत कर्मचारी इसे अपने कंपनी के बड़े बॉस का आधिकारिक आदेश समझकर अनजाने में पैसे ट्रांसफर कर बैठता है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे षड्यंत्र में इस्तेमाल किए गए मैलवेयर और तकनीक को चीन में बैठे साइबर अपराधियों द्वारा विकसित किए जाने की प्रबल आशंका है। इसके अलावा, भारतीय नागरिकों को अपना आसान शिकार बनाने के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित अवैध कॉल सेंटर्स के जरिए इन टूल्स का इस्तेमाल किए जाने के पुख्ता सुराग भी हाथ लगे हैं। बैंक खातों और सर्वर तक सुरक्षित पहुंच बनाने के लिए चीन आधारित वीपीएन (VPN) सेवाओं के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि इस गिरोह का अंतरराष्ट्रीय साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर चीन, भारत, पाकिस्तान और हांगकांग तक फैला हुआ है।

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