September 17, 2026

नीलम रिश्वत मामले में फैसला, कोर्ट ने सुनाई तीन साल की कैद

छतरपुर। स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय निर्माण की स्वीकृति (Approval) के एवज में रिश्वत लेने के मामले में छतरपुर जनपद की तत्कालीन ब्लॉक कोऑर्डिनेटर नीलम तिवारी को अदालत ने दोषी करार दिया है। विशेष न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी को 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

6 साल बाद आया अदालत का फैसला

यह मामला वर्ष 2020 का है। लोकायुक्त पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के लगभग छह वर्ष बाद छतरपुर न्यायालय ने इस पर फैसला सुनाया है:

  • सजा और जमानत: अदालत ने 3 साल की सजा सुनाए जाने के बाद, कानूनी प्रावधानों (धारा 389 CrPC/BNSS) के तहत आरोपी नीलम तिवारी को उच्च न्यायालय (High Court) में अपील दायर करने के लिए तत्काल अंतरिम जमानत दे दी है।

  • अपील की शर्त: डीपीओ (DPO) प्रवेश अहिरवार के अनुसार, यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर उच्च न्यायालय में अपील दाखिल नहीं की जाती है, तो आरोपी को सजा भुगतने के लिए जेल जाना होगा।

प्रति शौचालय ₹500 रिश्वत मांगने का था आरोप

मामले की पृष्ठभूमि ग्राम पंचायत धौरी से जुड़ी है, जहां पदस्थ रोजगार सहायक जितेंद्र सिंह ने लोकायुक्त से शिकायत दर्ज कराई थी:

  • मामला: स्वच्छ भारत अभियान के तहत निर्मित 13 शौचालयों की फोटो पोर्टल पर अपलोड की गई थीं, जिन्हें आगे की प्रक्रिया के लिए ब्लॉक कोऑर्डिनेटर की मंजूरी (Approval) की आवश्यकता थी।

  • रिश्वत की मांग: नीलम तिवारी ने प्रत्येक शौचालय के एप्रूवल के एवज में ₹500 के हिसाब से कुल ₹6,500 की रिश्वत मांगी थी। पैसे देने से मना करने पर एप्रूवल रोक दिया गया था।

लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई

शिकायत का सत्यापन करने के बाद सागर लोकायुक्त पुलिस की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से 18 फरवरी 2020 को छतरपुर में दबिश दी और ब्लॉक कोऑर्डिनेटर नीलम तिवारी को रिश्वत की राशि लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर उन्हें भ्रष्टाचार का दोषी मानते हुए सजा सुनाई।