भारतीय सिनेमा के इतिहास में अपनी बेहतरीन और जीवंत अदाकारी से अमिट छाप छोड़ने वाले महान अभिनेता इरफान खान भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनसे जुड़े दिलचस्प किस्से आज भी फैंस को भावुक कर देते हैं। एक लंबी और गंभीर बीमारी से लड़ते हुए इस महान कलाकार ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि इरफान सिर्फ एक बेमिसाल अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि वे निर्देशन (डायरेक्शन) के क्षेत्र में भी हाथ आजमा चुके थे। बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म ‘अलविदा’ किन्हीं कारणों से कभी रिलीज नहीं हो सकी। हाल ही में उनकी पत्नी सुतापा सिकदर ने इस अनसुनी फिल्म के बिहाइंड द सीन (BTS) की कुछ अनदेखी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की हैं।
नवाजुद्दीन सिद्दीकी को कैमरे के पीछे से गाइड करते दिखे इरफान
इरफान खान की पत्नी सुतापा सिकदर ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर एक बेहद भावुक कर देने वाला वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में फिल्म ‘अलविदा’ के सेट की कई पुरानी और यादगार तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। इन तस्वीरों में सबसे हैरान और खुश करने वाली बात यह है कि इरफान खान, बॉलीवुड के एक और दिग्गज अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी को सीन समझाते और उन्हें निर्देशित करते नजर आ रहे हैं। इरफान को पहली बार डायरेक्टर की कुर्सी पर बैठे देख फैंस की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस पोस्ट पर फैंस लगातार सुतापा से यह सवाल पूछ रहे हैं कि वे इस अनरिलीज्ड फिल्म को कहां देख सकते हैं, और इस वीडियो को इंटरनेट पर खूब पसंद किया जा रहा है।
कुष्ठ रोग पर आधारित एक बेहद खूबसूरत प्रेम कहानी
सुतापा ने इस पोस्ट के साथ एक बेहद खूबसूरत और लंबा कैप्शन लिखकर फिल्म की पृष्ठभूमि पर से पर्दा उठाया है। उन्होंने लिखा, "इरफान और मैंने मिलकर बहुत ही कम बजट में इस बेहतरीन लघु फिल्म (शॉर्ट फिल्म) का निर्माण किया था। यह फिल्म दरअसल कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) के संवेदनशील विषय पर आधारित थी। इस फिल्म की मूल कहानी मैंने लिखी थी, लेकिन इरफान ने अपनी जादुई सोच से इसे एक बेहद खूबसूरत और दिल को छू लेने वाली प्रेम कहानी का रूप दे दिया था।"
'जी-जी' कहते थे नवाजुद्दीन, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के दिनों को किया याद
अपनी पोस्ट में पुरानी यादों को ताजा करते हुए सुतापा ने नवाजुद्दीन सिद्दीकी के शुरुआती दिनों का भी जिक्र किया। उन्होंने आगे लिखा, "उस दौर में नवाजुद्दीन सिद्दीकी फिल्म इंडस्ट्री में बिल्कुल नए थे और काम की तलाश कर रहे थे। वे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में हमारे जूनियर थे। मुझे आज भी अच्छी तरह याद है कि वे सेट पर इरफान की हर बात को बेहद सम्मान के साथ सुनते थे और हर निर्देश पर सिर्फ 'जी जी' कहा करते थे। भले ही उस वक्त हमारा यह सेटअप बहुत छोटा था, लेकिन हमारे सपने बहुत बड़े थे और काम को लेकर हमारा जुनून उससे भी कहीं ज्यादा था।"

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