चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद हुए ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन ने राज्य के राजनीतिक पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के कद्दावर नेता और तिरुचेंदूर विधानसभा सीट से विधायक अनीता राधाकृष्णन ने सूबे की नई सत्ता पर काबिज गठबंधन सरकार पर बेहद तीखा और हमलावर रुख अख्तियार किया है। दक्षिणी तमिलनाडु में आयोजित एक संगठनात्मक पार्टी कार्यक्रम के दौरान राधाकृष्णन ने खुले मंच से यह बड़ा दावा किया कि अभिनेता से राजनेता बने नवनियुक्त मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली यह नई सरकार छह महीने का कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाएगी। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि चुनाव में मामूली शिकस्त झेलने वाले डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन बहुत जल्द एक बार फिर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में दमदार वापसी करेंगे।
टीवीके नेता आधव अर्जुना को खुली चुनौती, विधायक पद से इस्तीफे की मांग
अनीता राधाकृष्णन ने अपने संबोधन के दौरान सत्तारूढ़ दल 'तमिलगा वेत्री कज़गम' (TVK) के वरिष्ठ रणनीतिकार और विलीवक्कम सीट से नवनिर्वाचित विधायक आधव अर्जुना को सीधे निशाने पर लिया। राधाकृष्णन ने आधव अर्जुना के बढ़ते राजनीतिक कद और बयानों पर पलटवार करते हुए उन्हें चुनावी मैदान में उतरने की खुली चुनौती दे डाली। उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में कहा कि इस सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और इसके पास महज चार महीने का वक्त बचा है। उन्होंने अर्जुना को ललकारते हुए कहा कि अगर उनमें राजनीतिक हिम्मत है, तो वे अपनी विलीवक्कम सीट से तुरंत इस्तीफा दें, जिसके बदले में वे खुद अपनी तिरुचेंदूर सीट छोड़ने को तैयार हैं। उन्होंने आधव अर्जुना को तिरुचेंदूर आकर आमने-सामने का चुनाव लड़ने की चुनौती दी।
ढाई दशकों से तिरुचेंदूर में अजेय रहे हैं अनीता राधाकृष्णन
चुनावी मैदान में धूल चटाने का यह कड़ा दावा असल में तिरुचेंदूर विधानसभा सीट पर अनीता राधाकृष्णन की मजबूत जमीनी पकड़ को दर्शाता है। यह क्षेत्र पिछले 25 वर्षों से राधाकृष्णन का अभेद्य गढ़ बना हुआ है, जहाँ उनकी मर्जी के बिना विपक्षी दलों के लिए सियासी जमीन तलाशना नामुमकिन माना जाता है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत में पहली बार साल 2001 में डीएमके की धुर विरोधी पार्टी एआईएडीएमके (AIADMKE) के टिकट पर यहाँ से शानदार जीत दर्ज की थी। इसके बाद बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच साल 2009 में वे स्टालिन की पार्टी डीएमके में शामिल हो गए और तब से लेकर अब तक लगातार इस सीट पर भारी मतों से जीत हासिल करते आ रहे हैं।
सत्ता परिवर्तन के बाद दक्षिण की राजनीति में शह-मात का खेल तेज
तमिलनाडु की सत्ता की कमान जोसेफ विजय के हाथों में जाने के बाद से ही राज्य की प्रमुख द्रविड़ियन पार्टियां गहरे मंथन और आक्रामक रणनीति पर काम कर रही हैं। डीएमके नेताओं का मानना है कि नई सरकार के भीतर वैचारिक अंतर्विरोध और गठबंधन के साथियों के बीच आपसी खींचतान के चलते यह व्यवस्था लंबे समय तक नहीं चल पाएगी। इसी जमीनी हकीकत और अंतर्विरोधों का फायदा उठाने के लिए डीएमके के जिला स्तरीय नेता लगातार आक्रामक बयानबाजी कर रहे हैं ताकि नए शासन पर लगातार प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव बनाया जा सके। फिलहाल, इस खुली चुनौती और राधाकृष्णन के तीखे बयानों पर मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस बयान ने राज्य की भावी राजनीति को और अधिक दिलचस्प बना दिया है।

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