नई दिल्ली: भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) रणनीति को वैश्विक पटल पर और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को वियतनाम और दक्षिण कोरिया के पांच दिवसीय आधिकारिक दौरे पर रवाना हो गए हैं। इस उच्च स्तरीय विदेशी दौरे का मुख्य ध्येय उभरती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच मित्र देशों के साथ भारत की रक्षा साझेदारी को सुदृढ़ करना, रणनीतिक सैन्य सहयोग को बढ़ाना और पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक नियम-आधारित व्यवस्था स्थापित कर शांति व स्थिरता को बढ़ावा देना है। यात्रा की शुरुआत करने से पहले रक्षा मंत्री ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी उत्सुकता साझा करते हुए बताया कि वे इस यात्रा के पहले चरण के तहत वियतनाम की राजधानी हनोई पहुंचेंगे और दोनों देशों के बीच सदियों पुराने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए महत्वपूर्ण वार्ताओं का नेतृत्व करेंगे।
रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा को अभेद्य बनाने पर रहेगा मुख्य फोकस
वैश्विक मोर्चे पर बढ़ रही सुरक्षा चुनौतियों और समुद्री व्यापारिक मार्गों पर बढ़ते तनाव को देखते हुए इस दौरे को सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। रक्षा मंत्री ने प्रस्थान से पूर्व स्पष्ट किया कि इस पूरी यात्रा के दौरान उनका ध्यान मुख्य रूप से रक्षा उद्योग सहयोग, संयुक्त सैन्य साझेदारी और समुद्री सुरक्षा के रणनीतिक आयामों पर केंद्रित रहने वाला है। वर्तमान समय में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में जिस तरह से सुरक्षा समीकरण बदल रहे हैं, उसे देखते हुए लोकतांत्रिक देशों के बीच आपसी सैन्य समन्वय और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। भारत इन दोनों प्रमुख एशियाई देशों के साथ अपने रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को व्यापक विस्तार देकर क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम बढ़ा रहा है।
भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी में नया मोड़, सैन्य क्षमता को मिलेगी वित्तीय ताकत
हाल ही में वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने भारत का एक सफल आधिकारिक दौरा किया था, जिसके दौरान दोनों देशों ने अपने रक्षा और सुरक्षा संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (कॉम्प्रेहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप) का सबसे मजबूत स्तंभ घोषित किया था। दोनों देशों के बीच रक्षा नीति संवाद को निरंतर जारी रखने, तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास का दायरा बढ़ाने, उन्नत तकनीकी सहयोग, नौसैनिक बंदरगाहों के दौरों (पोर्ट कॉल्स) को सुगम बनाने और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को अंतिम रूप दिया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार द्वारा वियतनाम को दी गई रक्षा ऋण लाइनों (क्रेडिट लाइन्स) के तहत वियतनामी नौसेना और वायुसेना की सैन्य क्षमता को आधुनिक हथियारों से लैस करने की दिशा में भी इस हनोई यात्रा के दौरान बड़ी प्रगति होने की उम्मीद है।
दक्षिण कोरिया के साथ मजबूत होगी आर्थिक और तकनीकी सुरक्षा की आपूर्ति श्रृंखला
यात्रा के दूसरे चरण में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दक्षिण कोरिया (सियोल) पहुंचेंगे, जहां हाल के वर्षों में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक सुरक्षा, उन्नत सैन्य हार्डवेयर और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंध काफी तेजी से आगे बढ़े हैं। दोनों ही देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र को पूरी तरह स्वतंत्र, खुला और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुकूल बनाए रखने के लिए एक समान और साझा दृष्टिकोण रखते हैं। इस रणनीतिक साझेदारी के तहत रक्षा औद्योगिक गलियारों के निर्माण, क्रिटिकल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (उभरती तकनीक), सुरक्षित वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) और समकालीन सुरक्षा चुनौतियों पर मिलकर काम करने की एक विस्तृत और दीर्घकालिक योजना है। रक्षा मंत्री का यह अहम दौरा न केवल भारत की रणनीतिक पहुंच को मजबूत करेगा, बल्कि पूर्वी एशिया के प्रमुख देशों के साथ भारत के समुद्री सुरक्षा सहयोग को एक बिल्कुल नई और निर्णायक दिशा भी प्रदान करेगा।

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