पटना। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दल 'रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले)' के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने आरक्षण की व्यवस्था का विरोध करने या इसे समाप्त करने की मांग उठाने वाले तत्वों के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण देश के नागरिकों का एक मौलिक संवैधानिक अधिकार है और इसके साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ असंवैधानिक है।
आरक्षण विरोध को बताया संविधान विरोधी
एक संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में आरक्षण के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों और सोशल मीडिया अभियानों ने इस विषय को पुनः चर्चा में ला दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण व्यवस्था में फेरबदल या इसे खत्म करने की पैरवी करने वाले लोग सीधे तौर पर भारतीय संविधान की अवमानना कर रहे हैं। ऐसे में संविधान-विरोधी रुख अपनाने वाले लोगों के विरुद्ध राजद्रोह के कठोर प्रावधानों के तहत मामला दर्ज होना चाहिए।
जंतर-मंतर से लेकर सोशल मीडिया तक मुहिम का विरोध
आठवले ने कहा कि हाल के दिनों में जंतर-मंतर पर किए गए विरोध प्रदर्शनों और इंटरनेट पर चलाए जा रहे अभियानों के जरिए आरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आरक्षण को कभी भी समाप्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसे देश के संविधान द्वारा सुरक्षा और मान्यता प्रदान की गई है।
सभी जरूरतमंद वर्गों तक हुआ विस्तार
केंद्रीय मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान समय में आरक्षण का दायरा केवल अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को भी शामिल किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि जब समाज के सभी वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों को इस व्यवस्था का लाभ मिल रहा है, तब इसे समाप्त करने की मांग उठाने का कोई न्यायसंगत औचित्य नहीं बनता है।

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