नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी प्रशासनिक संरचना में बड़ा बदलाव करते हुए डिप्टी गवर्नरों के बीच विभागों के कार्यभार का नया आवंटन किया है। इस संगठनात्मक पुनर्गठन के तहत नवनियुक्त डिप्टी गवर्नर रोहित जैन को दस महत्वपूर्ण विभागों की कमान सौंपी गई है, जबकि वरिष्ठ डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जानकीरमन को ग्यारह विभागों का दायित्व मिला है। केंद्रीय बैंक का यह कदम आगामी चुनौतियों और बैंकिंग संचालन को अधिक सुव्यवस्थित तथा प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक फैसला माना जा रहा है, जिससे भविष्य की नीतिगत योजनाओं को नई गति मिलेगी।
वरिष्ठ अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का विभाजन
रिजर्व बैंक द्वारा जारी की गई नई व्यवस्था के अनुसार स्वामीनाथन जानकीरमन अब पर्यवेक्षण, विधि, निरीक्षण और जमा बीमा एवं ऋण गारंटी निगम जैसे अत्यंत संवेदनशील विभागों का नेतृत्व करेंगे, साथ ही उन पर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने का भी जिम्मा होगा। दूसरी ओर पूनम गुप्ता को मौद्रिक नीति विभाग सहित छह प्रमुख कार्यक्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है, जो देश की आर्थिक दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं। इसी क्रम में शिरीष चंद्र मुर्मू को विनियमन और प्रवर्तन से जुड़े पांच महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार सौंपा गया है, जिससे बैंक के विनियामक ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
रोहित जैन का व्यापक अनुभव और नई भूमिका
टी. रबी शंकर का कार्यकाल पूर्ण होने के बाद रोहित जैन को तीन वर्षों के लिए डिप्टी गवर्नर के पद पर नियुक्त किया गया है, जो इससे पहले कार्यकारी निदेशक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। केंद्रीय बैंक में चौंतीस वर्षों से अधिक का लंबा अनुभव रखने वाले जैन ने अपने करियर के दौरान विदेशी मुद्रा प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय बाजार विनियमन और जोखिम निगरानी जैसे विविध क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है। उनकी इस विशेषज्ञता को देखते हुए ही उन्हें दस प्रमुख विभागों का प्रभार दिया गया है, ताकि उनके प्रशासनिक कौशल का लाभ रिजर्व बैंक के जटिल ऑपरेशंस को बेहतर बनाने में लिया जा सके।
प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने की दिशा में केंद्रीय बैंक का बड़ा कदम
गुजरात विश्वविद्यालय से एमबीए और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से एम.कॉम की शिक्षा प्राप्त करने वाले रोहित जैन ने वर्ष 1991 में अपने करियर की शुरुआत की थी और वे पर्यवेक्षण विभाग में मुख्य महाप्रबंधक जैसे ऊंचे पदों पर भी रह चुके हैं। आरबीआई अधिनियम के तहत निर्धारित चार डिप्टी गवर्नरों की इस टीम के बीच विभागों का यह नया बंटवारा केंद्रीय बैंक की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से किया गया है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई टीम के पास अनुभव और नवाचार का बेहतरीन संतुलन है, जो भारतीय बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता और विकास को सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होगा।

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