AIIMS भोपाल ने रचा इतिहास, विश्व यूनिवर्सिटी रैंकिंग में हासिल किया दूसरा स्थान

भोपाल: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल ने चिकित्सा अनुसंधान (मेडिकल रिसर्च) और विज्ञान के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व और गौरवान्वित करने वाली वैश्विक उपलब्धि अपने नाम की है। प्रतिष्ठित वैश्विक संस्था 'एडी साइंटिफिक इंडेक्स वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026' की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में वर्ष 2025 से 2026 के बीच पूरे भारत में सबसे तीव्र गति से प्रगति करने वाले शीर्ष 10 संभ्रांत संस्थानों में एम्स भोपाल को देश भर में दूसरा (2nd) स्थान प्राप्त हुआ है। संस्थान ने अपनी उत्कृष्ट शोध प्रणाली के दम पर वैश्विक पायदान पर 1,235 स्थानों की एक लंबी और ऐतिहासिक छलांग लगाई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्थान की साख को बेहद मजबूत किया है।

इंडेक्स में चमके एम्स भोपाल के 183 वैज्ञानिक, अनुसंधान और उद्धरणों में एशिया स्तर पर जमाई धाक

एडी साइंटिफिक इंडेक्स द्वारा जारी विस्तृत आंकड़ों के मुताबिक, एम्स भोपाल के कुल 183 मूर्धन्य वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को इस प्रतिष्ठित वैश्विक सूची में जगह दी गई है। संस्थान के शोध स्तर की गुणवत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनमें से 2 शीर्ष वैज्ञानिक दुनिया के टॉप 10 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शुमार हैं। इसके अतिरिक्त, 31 वैज्ञानिक शीर्ष 30 प्रतिशत में, 66 वैज्ञानिक शीर्ष 50 प्रतिशत में और 139 वैज्ञानिक दुनिया के शीर्ष 70 प्रतिशत शोधकर्ताओं की विशिष्ट सूची में अपना स्थान बनाने में सफल रहे हैं।

कुल वैज्ञानिक उद्धरणों (साइटेशन्स) के संचयी आधार पर एम्स भोपाल की वैश्विक रैंकिंग 3,591वीं है, जबकि पूरे एशिया महाद्वीप में संस्थान 1,358वें और भारत के सभी वैज्ञानिक संस्थानों में 290वें स्थान पर काबिज है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शुद्ध 'खोज आधारित रैंकिंग' (इन्वेंशन एंड डिस्कवरी ओरिएंटेड इंडेक्स) में एम्स भोपाल ने समूचे भारत में प्रथम स्थान (Rank 1) प्राप्त कर देश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों को पीछे छोड़ दिया है।

आम मरीजों को मिलेगा सीधा लाभ, विकसित होंगी अत्याधुनिक उपचार पद्धतियां

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, एम्स भोपाल की यह अकादमिक और वैज्ञानिक सफलता केवल कागजों या प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा और दूरगामी लाभ अस्पताल में आने वाले आम और गंभीर मरीजों को मिलेगा। उच्च स्तरीय शोध के माध्यम से चिकित्सा क्षेत्र में नई और कम खर्चीली उपचार पद्धतियां विकसित होंगी। इससे जटिल बीमारियों की प्रारंभिक स्तर पर ही सटीक पहचान (डायग्नोसिस) करना और उनका लक्षित इलाज करना कहीं अधिक प्रभावी और सुलभ हो जाएगा। साथ ही, दुनिया की सबसे आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का सीधा लाभ क्षेत्रीय और गरीब मरीजों तक आसानी से पहुंच सकेगा।

समर्पित टीम, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों की सामूहिक लगन का मीठा फल: प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर

संस्थान की इस स्वर्णिम सफलता पर गहरा हर्ष व्यक्त करते हुए एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर) एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर ने कहा कि यह ऐतिहासिक गौरव संस्थान के समर्पित वैज्ञानिकों, वरिष्ठ शिक्षकों, युवा शोधकर्ताओं और मेधावी विद्यार्थियों के दिन-रात के कड़े परिश्रम, अटूट प्रतिबद्धता और सामूहिक प्रयास का ही सुखद परिणाम है।

उन्होंने संस्थान के विजन को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि एम्स भोपाल का मुख्य उद्देश्य केवल अकादमिक शोध करना नहीं, बल्कि ऐसे व्यावहारिक अनुसंधान को बढ़ावा देना है जिसका उपयोग सीधे तौर पर मरीजों के क्लीनिकल इलाज में किया जा सके और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को इसका लाभ मिले। यह वैश्विक सम्मान भविष्य में संस्थान को और अधिक उच्च स्तरीय एवं मानवतावादी अनुसंधान करने के लिए एक नई ऊर्जा और प्रेरणा देगा।