November 7, 2026

कर्नाटक सरकार के दावे पर राहुल गांधी का केंद्र से सवाल, E20 पर बढ़ी बहस

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ईंधन में एथेनॉल के सम्मिश्रण की निर्धारित सीमा को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी एक बयान के जरिए आरोप लगाया कि देशभर में आम उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल के नाम पर तय सीमा से काफी अधिक मात्रा में एथेनॉल मिलाकर दिया जा रहा है। उन्होंने सरकार की इस नीति को 'E20 बना 420' की संज्ञा देते हुए दावा किया कि इससे आम जनता की जेब और वाहनों दोनों को भारी आर्थिक व तकनीकी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

कर्नाटक में नमूनों की जांच और चौकाने वाले दावे

राहुल गांधी ने अपनी बात के समर्थन में कर्नाटक सरकार द्वारा कराई गई एक हालिया जांच का प्रमुखता से हवाला दिया। उन्होंने बताया कि कर्नाटक सरकार ने राज्य के सात अलग-अलग जिलों से पेट्रोल के नमूने एकत्र कराकर उनकी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने दावा किया कि बाजार में बिक रहे ईंधन में एथेनॉल की मात्रा 26 से 31 प्रतिशत तक पाई गई है, जो कि सरकार द्वारा तय 20 फीसदी की अधिकतम सीमा से बहुत अधिक है।

विभिन्न तेल कंपनियों के नमूनों में भारी अनियमितता का आरोप

कांग्रेस नेता ने आंकड़ों का ब्योरा प्रस्तुत करते हुए कहा कि कुल 14 परीक्षण नमूनों में से 11 में एथेनॉल का स्तर 20 प्रतिशत के मानक से कहीं अधिक मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के एक नमूने में 31.2 फीसदी और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के नमूने में 30.5 फीसदी तक एथेनॉल का सम्मिश्रण पाया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों जैसे आईओसीएल, एचपीसीएल और बीपीसीएल के साथ-साथ नायरा तथा शेल जैसी निजी क्षेत्र की तेल कंपनियों के ईंधन में भी यह गंभीर गड़बड़ी देखी गई है। इसके अतिरिक्त उन्होंने आरोप लगाया कि इन तेल कंपनियों की अपनी आंतरिक प्रयोगशालाएं अपनी जांच रिपोर्टों में एथेनॉल के वास्तविक स्तर का उल्लेख करने से लगातार बच रही हैं।

वाहनों के माइलेज और इंजन पर प्रतिकूल प्रभाव

राहुल गांधी ने कहा कि आम नागरिक अपनी मेहनत की कमाई से महंगे पेट्रोल की पूरी कीमत अदा कर रहे हैं, किंतु उनकी गाड़ियों में मनमाने तरीके से अत्यधिक एथेनॉल भरा जा रहा है। उन्होंने आगाह किया कि देश में मौजूद अधिकांश पुराने और सामान्य वाहन इतने अधिक एथेनॉल सम्मिश्रण को झेलने के लिए निर्मित नहीं किए गए हैं। इस वजह से गाड़ियों के माइलेज में भारी गिरावट आ रही है, इंजन खराब हो रहे हैं और उपभोक्ताओं को बार-बार महंगी मरम्मत करानी पड़ रही है। उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि पेट्रोल पंपों पर सम्मिश्रण के अनुपात की कोई पारदर्शी जानकारी प्रदर्शित नहीं की जाती, जिससे खरीदारों के पास अपनी इच्छानुसार सही ईंधन चुनने का कोई विकल्प शेष नहीं रहता।

प्रधानमंत्री से तीखे सवाल और पारदर्शी कार्रवाई की मांग

इस पूरे प्रकरण को लेकर राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्टीकरण की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि देश के नागरिकों की गाड़ियों में वास्तव में किस गुणवत्ता का ईंधन भरा जा रहा है और पेट्रोल में एथेनॉल की असली मात्रा का सच क्या है। इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि निर्धारित मानकों का उल्लंघन कर अत्यधिक एथेनॉल मिलाने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कब की जाएगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार की इन संदिग्ध नीतियों से आम उपभोक्ता बदहाल हो रहे हैं, जबकि कुछ चुनिंदा पूंजीपतियों को सीधा फायदा पहुंचाया जा रहा है।