November 5, 2026

अफगानिस्तान में फिर बढ़ी अफीम की पैदावार, पांच गुना तक पहुंचा उत्पादन

काबुल। अफगानिस्तान में तालिबान शासन के सख्त प्रतिबंधों के बावजूद पिछले एक साल के दौरान अफीम की खेती और पैदावार में लगभग पांच गुना तक का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (यूएनओडीसी) के ताजा सर्वेक्षण में यह चिंताजनक खुलासा हुआ है। उल्लेखनीय है कि अगस्त 2021 में सत्ता संभालने के बाद तालिबान ने अप्रैल 2022 में धार्मिक और सामाजिक कारणों का हवाला देते हुए अफीम की खेती तथा सभी नशीले पदार्थों के व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।

प्रतिबंध के बावजूद पैदावार में भारी बढ़ोतरी

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रतिबंध के पीछे अंतरराष्ट्रीय वैधता हासिल करने और देश के भीतर नशे की लत से निपटने का दबाव भी प्रमुख वजह था। शुरुआती दिनों में इस रोक का असर दिखा और अफीम की खेती में गिरावट आई, लेकिन अब इसमें फिर से तेजी आ गई है। यूएनओडीसी की रिपोर्ट के अनुसार, जहां प्रतिबंध के बाद महज 10 हजार हेक्टेयर भूमि पर अफीम उगाई जा रही थी, वहीं अब इसमें 330 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होकर यह रकबा 43 हजार हेक्टेयर के पार पहुंच गया है। इसी तरह अफीम का अनुमानित उत्पादन भी 300 टन से बढ़कर लगभग 1,500 टन दर्ज किया गया है, हालांकि यह आंकड़ा प्रतिबंध से पूर्व के 2 लाख 32 हजार हेक्टेयर के स्तर से अभी भी काफी कम है।

कार्रवाई से बचने के लिए किसानों के नए पैंतरे

तालिबानी सख्ती के बीच किसानों ने अफीम की खेती जारी रखने के लिए नए और गुप्त तरीके खोज निकाले हैं। किसान अब पारंपरिक अनाज की फसलों के बीच में या अपने घरों की चारदीवारी के अंदर छोटे-छोटे हिस्सों में अफीम उगा रहे हैं। इसके अलावा, प्रशासनिक अधिकारियों की नजरों से बचने के लिए बुआई और कटाई के समय में भी बदलाव किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, जब तक गरीब किसानों के पास जीवनयापन और परिवार के भरण-पोषण का कोई ठोस वैकल्पिक साधन नहीं होगा, तब तक इस अवैध खेती पर पूरी तरह रोक लगाना व्यावहारिक रूप से कठिन बना रहेगा।

पूर्वोत्तर प्रांतों की ओर स्थानांतरित हुआ खेती का केंद्र

सर्वेक्षण के आंकड़ों से पता चलता है कि अफगानिस्तान के कुल 34 में से 16 प्रांतों में अफीम की खेती व्यापक रूप से की जा रही है। एक बड़ा बदलाव यह देखा गया है कि अब कुल अफीम उत्पादन का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में केंद्रित हो गया है, जबकि प्रतिबंध लागू होने से पहले अफीम की मुख्य खेती देश के दक्षिण-पश्चिमी इलाकों में हुआ करती थी।