महिला आयोग चेयरपर्सन के इस्तीफे के बाद नर्सिंग स्टाफ ने स्थगित की हड़ताल

अंबाला। हरियाणा के सरकारी नागरिक अस्पतालों में नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन की ओर से प्रस्तावित दो घंटे की 'पेन डाउन' हड़ताल को फिलहाल टाल दिया गया है। अंबाला की प्रधान नर्सिंग ऑफिसर नीलम ने इस संबंध में जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि संगठन की आगामी गेट मीटिंग के दौरान सभी प्रमुख मांगों और रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इससे पहले, कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में एक नाबालिग लड़की के साथ हुए यौन उत्पीड़न के संवेदनशील मामले में महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया द्वारा दिए गए एक विवादित बयान के खिलाफ नर्सिंग कर्मियों में भारी आक्रोश था, जिसके विरोध में पूरे प्रदेश के नर्सिंग स्टाफ ने मंगलवार को दो घंटे तक कार्य बहिष्कार किया था और बुधवार को भी इस हड़ताल को जारी रखने की घोषणा की गई थी।

काउंसलिंग की गोपनीय बातें सार्वजनिक करने का आरोप

प्रदेश नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन की प्रांतीय अध्यक्ष विनीता कुमारी ने महिला आयोग की प्रमुख पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि रेनू भाटिया एक काउंसलर की हैसियत से पीड़ित नाबालिग बच्ची से मिलने गई थीं। एक काउंसलर के तौर पर पीड़ित बच्ची ने जो भी बातें साझा कीं, उन्हें मीडिया के सामने उजागर करना बच्ची को मानसिक रूप से और ज्यादा प्रताड़ित करने जैसा है। उन्होंने सवाल उठाया कि बंद कमरे में हुई काउंसलिंग की गोपनीय बातें आखिर सार्वजनिक रूप से बाहर कैसे आ गईं।

नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी पर नाराजगी

एसोसिएशन की अध्यक्ष ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि रेनू भाटिया ने ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्सों को लेकर बेहद आपत्तिजनक और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की अध्यक्ष ने हमारी साथी नर्सों पर अपनी बच्चियों को दुष्कर्मी के पास भेजने जैसी घिनौनी बात कही है। विनीता कुमारी ने कहा कि एक महिला आयोग की शीर्ष जिम्मेदारी संभालते हुए महिलाओं और सेवा भाव से काम करने वाली नर्सों के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग करना कतई बर्दाश्त के काबिल नहीं है। यह पूरे नर्सिंग जगत की महिलाओं का घोर अपमान है।

अमर्यादित बयानों से परिवारों और बच्चों पर पड़ रहा असर

विनीता ने नर्सिंग स्टाफ की पारिवारिक और मानसिक पीड़ा को बयां करते हुए कहा कि आज हमारी बेटियां बड़ी हो रही हैं, वे समाज की हर खबर को सुनती और समझती हैं। इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना और अमर्यादित बयानों के कारण जब नर्सें ड्यूटी के बाद अपने घर लौटती हैं, तो उनके खुद के बच्चे उनसे असहज करने वाले सवाल पूछ रहे हैं कि क्या उन्होंने ऐसा कृत्य करवाया है। इस मानसिक प्रताड़ना के विरोध में ही पूरे राज्य का नर्सिंग स्टाफ लामबंद हुआ था।