रींगस। सीकर जिले के रींगस कस्बे में आवारा श्वानों का खौफ एक बार फिर स्थानीय निवासियों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। शहर के वार्ड नंबर 15 के अंतर्गत आने वाले डाक वालों के मोहल्ले में रविवार को एक खूंखार आवारा कुत्ते ने अचानक राहगीरों पर धावा बोल दिया। इस अप्रत्याशित हमले में देखते ही देखते लगभग 10 लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए। इस वाकये के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई और स्थानीय जनता गहरे खौफ के साए में जीने को मजबूर है।
आक्रामक कुत्ते के हमले से बच्चों और बुजुर्गों सहित कई घायल
चश्मदीदों ने बताया कि कुत्ता इस कदर हिंसक हो चुका था कि वह रास्ते से गुजरने वाले हर शख्स को निशाना बना रहा था। इस दौरान गली में मौजूद बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग इसकी चपेट में आ गए। लहूलुहान हालत में चीख रहे घायलों को पड़ोसियों और परिजनों ने लाठियों के सहारे बमुश्किल बचाया। इसके तुरंत बाद सभी पीड़ितों को रींगस के राजकीय उप जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों की टीम ने घायलों को प्राथमिक चिकित्सा देने के साथ ही एंटी-रेबीज के टीके लगाए। डॉक्टरों के मुताबिक, एक मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे प्राथमिक उपचार के बाद बड़े अस्पताल (हायर सेंटर) के लिए रवाना कर दिया गया है।
बार-बार शिकायत के बाद भी सो रहा नगरपालिका प्रशासन
इस भयावह घटना के बाद से ही वार्डवासियों और मोहल्ले के लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। स्थानीय नागरिकों ने तीखा रोष प्रकट करते हुए कहा कि क्षेत्र में लावारिस पशुओं और श्वानों का जमावड़ा लंबे समय से एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। इस बाबत कई मर्तबा नगरपालिका प्रशासन को लिखित और मौखिक रूप से आगाह किया गया था, लेकिन जिम्मेदारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। लोगों का साफ तौर पर आरोप है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इन आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई विशेष अभियान चलाया होता, तो आज मासूम बच्चों और बुजुर्गों को इस दर्दनाक स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
समाधान न होने पर उग्र आंदोलन और धरने की चेतावनी
वार्ड के प्रबुद्ध नागरिकों ने बताया कि रींगस शहर के अलग-अलग हिस्सों में पहले भी श्वान दंश की कई घटनाएं घटित हो चुकी हैं, परंतु पालिका स्तर पर कोई ठोस और प्रभावी नीति न बनने से जन आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इस हादसे के बाद अब लोगों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं और ज्यादा गहरी हो गई हैं, जिसके चलते लोग अपने नौनिहालों को घरों से बाहर भेजने में भी कतरा रहे हैं। आक्रोशित निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पालिका प्रशासन ने इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला और इन हिंसक पशुओं को गलियों से नहीं हटाया, तो वे पालिका कार्यालय का घेराव कर तालाबंदी और धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।

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