जेवर एयरपोर्ट बना उत्तर भारत के विकास का नया प्रवेश द्वार
लखनऊ|एशिया के सबसे बड़े हवाई अड्डे की ओर कदम बढ़ा रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने न केवल 'जेवर' के नाम को सार्थक किया है, बल्कि चार राज्यों और 20 जिलों की तकदीर बदलने की तैयारी भी कर ली है। जेवर एयरपोर्ट का प्रभाव केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर के विकास का नया मॉडल बन चुका है।
यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे आकार ले रहा यह ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट अब धरातल पर दिखने लगा है। रबूपुरा, दनकौर और जहांगीरपुर जैसे कस्बे अब वैश्विक औद्योगिक मानचित्र पर हैं। यहाँ मेडिकल डिवाइस पार्क, फिल्म सिटी और सेमीकंडक्टर जैसी बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। स्थानीय लोगों की चर्चाओं में अब खेती के साथ-साथ 'प्लॉट', 'फैक्ट्री' और 'लॉजिस्टिक्स' जैसे शब्द शामिल हो गए हैं।
चार राज्यों को जोड़ेगा यह कनेक्टिविटी हब यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड के लिए भी गेम-चेंजर साबित हो रहा है। फरीदाबाद-जेवर एक्सप्रेसवे और पलवल लिंक रोड के बनने से घंटों की दूरी मिनटों में सिमट जाएगी। राजस्थान के भरतपुर और अलवर के व्यापारी यहाँ निवेश के अवसर तलाश रहे हैं, वहीं उत्तराखंड परिवहन निगम के साथ हुए समझौते के तहत देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी जैसे शहरों के लिए सीधी बस सेवाएं संचालित की जाएंगी।
रोजगार और सप्लाई चेन का नया केंद्र लॉजिस्टिक्स पार्क और वेयरहाउसिंग गतिविधियों के कारण यह क्षेत्र उत्तर भारत का प्रमुख सप्लाई चेन हब बनने की ओर अग्रसर है। खुर्जा, बुलंदशहर, अलीगढ़ और आगरा जैसे शहरों में औद्योगिक हलचल तेज हो गई है। होटल और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। हालांकि, विकास की इस लहर के बीच किसान संगठन रोजगार संबंधी वादों और जमीन के उचित मुआवजे की मांग को लेकर अपनी आवाज भी बुलंद कर रहे हैं। स्थानीय युवाओं को उम्मीद है कि उद्योगों के आने से उनका जीवन स्तर बेहतर होगा।

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