माले। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारतीय राजदूत बालासुब्रमण्यन के साथ देश की सबसे बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना 'ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट' (थिलामाले ब्रिज) का दौरा किया। अतीत में 'इंडिया आउट' अभियान का चेहरा रहे राष्ट्रपति मुइज्जू के रुख में इस यात्रा के दौरान बड़ा बदलाव देखा गया। उन्होंने परियोजना के निर्माण में भारत की भूमिका की खुलकर सराहना की और इसे दोनों देशों के बीच मजबूत और स्थायी दोस्ती का एक बड़ा प्रतीक बताया। राष्ट्रपति ने पहली बार इस निर्माणाधीन पुल पर माले से विलिमाले तक पैदल चलकर निर्माण कार्यों का जायजा लिया।
मालदीव का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, अगले साल पूरा होने की उम्मीद
राजधानी माले को विलिमाले से जोड़ने वाली यह परियोजना मालदीव के इतिहास की सबसे बड़ी ढांचागत विकास परियोजना है। हाल ही में माले और विलिमाले के बीच सभी प्री-कास्ट सेगमेंट्स को जोड़ने का काम सफलतापूर्वक पूरा किया गया था। राष्ट्रपति मुइज्जू ने निरीक्षण के बाद उम्मीद जताई कि यह पुल अगले वर्ष तक पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा, जिससे माले क्षेत्र में रहने वाली एक बड़ी आबादी को यातायात में बहुत बड़ी राहत मिलेगी।
पीएम मोदी का जताया आभार, 500 मिलियन डॉलर की परियोजना
राष्ट्रपति मुइज्जू ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि अपनी पहली मुलाकात में ही उन्होंने पीएम मोदी से इस प्रोजेक्ट के काम में तेजी लाने का अनुरोध किया था, जिसके बाद दोनों देशों द्वारा एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया गया था। कुल 500 मिलियन डॉलर (लगभग 7.7 बिलियन मालदीवियन रुफिया) की लागत वाली यह परियोजना भारत के एग्जिम बैंक से मिले 400 मिलियन डॉलर के रियायती ऋण और भारत सरकार के 100 मिलियन डॉलर के अनुदान से संचालित हो रही है।
मुइज्जू का बदलता कूटनीतिक रुख
2023 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भारत विरोधी रुख अपनाने वाले राष्ट्रपति मुइज्जू का यह बयान भारत से मिल रही निरंतर आर्थिक व तकनीकी मदद के बीच उनके बदलते सार्वजनिक रुख को दर्शाता है। दौरे के समय मौजूद भारतीय उच्चायुक्त बालासुब्रमण्यम ने कहा कि भारत सरकार मालदीव के विकास के लिए बेहद करीबी सहयोग के साथ इस परियोजना को पूरा करने में जुटी हुई है।

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