दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में महिलाओं के पास अपना पक्का घर है, वे यहाँ नौकरियां कर रही हैं, अपनी उच्च शिक्षा पूरी कर रही हैं और रोजमर्रा की जिंदगी भी यहीं बिता रही हैं, लेकिन आधिकारिक दस्तावेजों में स्थायी पता किसी अन्य गांव या दूसरे शहर का होने के कारण कई महिलाओं को 'पिंक सहेली कार्ड' की सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है। एक मीडिया पड़ताल के दौरान यह महत्वपूर्ण और गंभीर बात सामने आई है।
पड़ताल में सामने आया दस्तावेजों की वजह से आ रहा संकट
पड़ताल के दौरान ऐसी अनेक महिलाएं मिलीं, जिनका दिल्ली में अपना खुद का मकान है, किंतु पैतृक गांव में भी संपत्ति होने और भविष्य में वहीं वापस जाकर बसने की योजना के चलते उनके पहचान पत्र व अन्य दस्तावेज गांव के पते पर ही अपडेटेड हैं। इसके अलावा कई छात्राएं पढ़ाई के सिलसिले में दिल्ली आई हैं, जिनके पास वैध रेंट एग्रीमेंट आदि भी मौजूद हैं। पहले इन महिलाओं को बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा का लाभ मिलता था, लेकिन पहचान पत्र में दिल्ली का स्थानीय पता न होने के कारण अब उन्हें 'पिंक सहेली कार्ड' की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
पीड़ित महिलाओं की जुबानी, उन्हीं की زبانی
इस समस्या से जूझ रही कुछ महिलाओं ने अपनी बात रखते हुए बताया:
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दिव्या (निवासी, पूर्वी दिल्ली): विवाह के पश्चात वह दिल्ली आकर रहने लगी थीं। उनका पूरा परिवार पिछले लगभग 14 वर्षों से दिल्ली में अपना घर बनाकर स्थायी रूप से रह रहा है, लेकिन ससुराल का पैतृक घर बिहार राज्य में स्थित होने के कारण पहचान पत्र में वहीं का पता दर्ज है। इसी वजह से उनका 'पिंक सहेली कार्ड' नहीं बन पा रहा है।
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मंजू देवी (निवासी, शाहदरा): उनका घर दिल्ली और उनके पैतृक गांव दोनों ही जगहों पर है। भविष्य में कुछ समय बाद गांव में ही जाकर स्थायी रूप से बसने की योजना के चलते उन्होंने अपने कागजात गांव के पते पर ही रखे हुए हैं। पहचान पत्र में दिल्ली का पता न होने के कारण उन्हें 'पिंक कार्ड' जैसी आवश्यक सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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श्रुति (निवासी, लक्ष्मीनगर): वह पढ़ाई करने के उद्देश्य से दिल्ली आई थीं। उन्होंने यहीं से अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की है और वर्तमान में परास्नातक (पोस्ट ग्रेजुएशन) कर रही हैं। अब तक सार्वजनिक बसों में सफर करने के लिए उन्हें कोई किराया नहीं देना पड़ता था। उनके पास वैध रेंट एग्रीमेंट भी उपलब्ध है, इसके बावजूद स्थानीय पता न होने की वजह से उनका 'पिंक कार्ड' नहीं बन पा रहा है।

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