बिलासपुर। यदि आप छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के निवासी हैं और दैनिक जीवन में दूध या उससे बने डेयरी उत्पादों का उपभोग करते हैं, तो यह खबर आपके स्वास्थ्य और सतर्कता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। जिले में इन दिनों दूध, दही, देसी घी और पनीर जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थों के नमूनों (सैंपलों) के लगातार अमानक और फेल होने के चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। इस मामले में हैरान करने वाली बात यह है कि केवल स्थानीय छोटी डेयरियां ही नहीं, बल्कि बाजार में स्थापित प्रतिष्ठित और बड़े ब्रांड्स के उत्पाद भी जांच की कसौटी पर पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा बीते नौ महीनों के भीतर विभिन्न संस्थानों से एकत्र किए गए नमूनों की लैब जांच रिपोर्ट में यह बात उजागर हुई है कि ये खाद्य सामग्रियां उपभोग के लिए तय मानकों पर खरी नहीं उतर रही हैं। इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद अब खाद्य सुरक्षा प्रशासन संबंधित विक्रेताओं और ब्रांडों पर बड़ी कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में जुट गया है।
प्रतिष्ठित ब्रांड्स के शुद्धता के दावों पर उठे गंभीर सवाल
खाद्य सुरक्षा विभाग की इस व्यापक जांच में सबसे चिंताजनक पहलू यह उभरकर आया है कि शुद्धता का दावा करने वाले ‘अमूल’, ‘गोवर्धन’ और ‘वचन’ जैसे देश के नामचीन ब्रांड्स के डेयरी उत्पाद भी मानकों के विपरीत पाए गए हैं। विभाग की टीमों ने स्थानीय रिटेल आउटलेट्स और प्रमुख मार्ट्स से इन कंपनियों के घी व अन्य उत्पादों के सैंपल जब्त कर जांच के लिए रायपुर स्थित राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजे थे। लैब से आई विस्तृत रिपोर्टों में इन बड़े ब्रांड्स के सैंपल्स अमानक पाए गए हैं, जिससे अब बड़े नामों की गुणवत्ता और गारंटी पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस खुलासे के बाद बिलासपुर का खाद्य सुरक्षा विभाग लगातार विभिन्न प्रतिष्ठानों में सघन जांच अभियान चलाकर मिलावटी व नकली सामग्री बेचने वालों के खिलाफ शिकंजा कस रहा है।
त्योहारों से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग की सख्त कार्रवाई और सैंपलिंग
आगामी दीपावली पर्व को ध्यान में रखते हुए जिले भर में मिलावटखोरों पर नकेल कसने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा विभाग ने अपनी सतर्कता और ज्यादा बढ़ा दी है। इसी कड़ी में विभाग की टीम ने शहर के ‘नेशनल डेयरी’, ‘शौर्य सुपरमार्ट’, ‘अपना मार्ट’ और ‘बजरंग स्वीट्स’ जैसे कई प्रमुख व्यावसायिक संस्थानों से दूध, दही, पनीर तथा मावा (खोवा) के नमूने सील किए हैं। इसके अतिरिक्त शहर की विभिन्न नामचीन मिष्ठान दुकानों से भी मिठाइयों के सैंपल जांच हेतु भेजे जा रहे हैं। पर्वतीय सीजन में दुग्ध उत्पादों और मिठाइयों की अत्यधिक मांग को देखते हुए प्रशासन यह सुनिश्चित करने में लगा है कि आम नागरिकों की सेहत के साथ कोई खिलवाड़ न हो सके। अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच में दोषी पाई गई इन बड़ी कंपनियों और स्थानीय व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर आने वाले दिनों में प्रशासन कितना भारी आर्थिक जुर्माना और दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाता है।

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