चंडीगढ़। पंजाब में मादक पदार्थों की तस्करी का स्वरूप अब पूरी तरह बदल चुका है। कभी गली-मोहल्लों में छोटे स्तर पर बिकने वाला यह अवैध कारोबार अब बहुस्तरीय और संगठित नेटवर्क का रूप ले चुका है। सीमा पार से अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक के जरिए हेरोइन और हथियारों की खेप लगातार भेजी जा रही है। पंजाब पुलिस, सीमा सुरक्षा बल, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय और ड्रग कंट्रोल विभाग की संयुक्त पड़ताल में यह बात स्पष्ट हुई है कि तस्करी अब केवल सड़क पर नशीले पदार्थ बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जटिल वित्तीय लेन-देन, फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का व्यापक इस्तेमाल हो रहा है। हजारों छोटे पेडलरों की गिरफ्तारी के बावजूद नशे की उपलब्धता पूरी तरह समाप्त न होने के कारण अब जांच एजेंसियों ने केवल अपराधियों को पकड़ने के बजाय पूरे सप्लाई नेटवर्क, मनी ट्रेल और डिजिटल साक्ष्यों को ध्वस्त करने पर ध्यान केंद्रित किया है।
युवाओं और विद्यार्थियों को लालच देकर बना रहे 'कैरियर', सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ा निगरानी का दायरा
तस्करी के इस नए मॉडल में सीमावर्ती इलाकों के छात्रों और बेरोजगार युवाओं को पैसों का प्रलोभन देकर नेटवर्क में शामिल किया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि तस्कर पहले आर्थिक रूप से कमजोर और उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं से छोटे-मोटे काम करवाते हैं और फिर भरोसा बनने पर उनसे ड्रोन से गिराई गई खेपों को उठवाते हैं। एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स और इंटरनेट कॉलिंग के जरिए ड्रॉप लोकेशन साझा की जाती है, जहां से जीपीएस लोकेशन के आधार पर माल उठाकर आगे पहुंचाया जाता है। काउंटर इंटेलिजेंस और सुरक्षा बलों ने इस तरह के कई स्थानीय मॉड्यूलों का भंडाफोड़ किया है। पंजाब पुलिस और बीएसएफ ने सेकेंड लाइन ऑफ डिफेंस पर सतर्कता बढ़ा दी है तथा एंटी-ड्रोन सिस्टम और नाइट पेट्रोलिंग को और अधिक मजबूत किया है।
अमृतसर सीमा पर वर्ष 2026 में 60 से अधिक ड्रोन व 260 किलो हेरोइन बरामद, हथियारों का जखीरा जब्त
सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए अभियानों में तस्करी के बेहद चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। वर्ष 2026 में 31 जुलाई तक केवल अमृतसर सीमा क्षेत्र से बीएसएफ और पुलिस ने 60 से अधिक पाकिस्तानी ड्रोन बरामद किए या मार गिराए हैं। इस अवधि के दौरान 260 किलोग्राम से अधिक हेरोइन, 11 किलो मेथामफेटामाइन (ICE), 10 किलो अफीम और भारी मात्रा में नशीली गोलियां जब्त की गई हैं। इसके अलावा 250 से अधिक आधुनिक पिस्तौल, एके-47, राइफलें, 800 से ज्यादा कारतूस और चार हैंड ग्रेनेड भी बरामद किए गए हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि सीमा पार से हथियार और मादक पदार्थ भेजने के लिए ड्रोन ही तस्करों का मुख्य साधन बन चुका है।
वैध दवा प्रणालियों के दुरुपयोग और वित्तीय साम्राज्य को ध्वस्त करने पर केंद्रित हुई संयुक्त कार्रवाई
नशे के इस बदलते कारोबार में प्रेगाबालिन, ट्रामाडोल और कोडीन जैसी नियंत्रित दवाओं के अवैध उपयोग ने भी प्रशासनिक तंत्र की चिंता बढ़ा दी है। कई मेडिकल प्रतिष्ठानों के रिकॉर्ड सत्यापन और लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई से स्पष्ट हुआ है कि वैध दवा वितरण प्रणाली की आड़ में भी नशा नेटवर्क सक्रिय है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक तस्करों की अवैध संपत्तियों, बैंक खातों और वित्तीय रीढ़ पर प्रहार नहीं किया जाएगा, तब तक इस समस्या पर स्थायी नियंत्रण संभव नहीं है। इसी रणनीति के तहत अब ईडी और एनसीबी के सहयोग से मनी ट्रेल की गहन जांच की जा रही है ताकि नशा तस्करी के पूरे आर्थिक तंत्र को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सके।

More Stories
पुलिस विभाग में हड़कंप, IPS अधिकारी ने ASI समेत चार जवानों पर गिराई गाज
क्या जानते हैं? भगवान शिव को ‘महादेव’ नाम यहीं मिला था, गोकर्णेश्वर से जुड़ा है खास रहस्य
वागड़ में शिव भक्ति का अनोखा रंग, 45 दिनों तक चलता है श्रावण उत्सव