अयोध्या। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने मंदिरों में भक्तों द्वारा अर्पित की जाने वाली राशि को 'चंदा' संबोधित करने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे सनातन आस्था का अपमान करार दिया है। संगठन ने अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर के समर्पण कोष में हेराफेरी का झूठा दावा करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कदम उठाने की वकालत की है। यह प्रतिक्रिया उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस वक्तव्य के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कुछ तत्व जानबूझकर अयोध्या की पावन छवि को धूमिल करने और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की साख पर सवाल उठाने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं, जिसकी वास्तविकता एसआईटी की जांच से जल्द ही सबके सामने आ जाएगी।
वीएचपी प्रवक्ता की मांग और 'चंदा' शब्द पर आपत्ति
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने बिना किसी प्रामाणिक साक्ष्य के धन के दुरुपयोग के आरोप लगाने वालों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने मांग की कि विशेष जांच दल (एसआईटी) को ऐसे भ्रामक दावे करने वाले व्यक्तियों को तुरंत नोटिस जारी करना चाहिए और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के प्रयास में उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश करनी चाहिए। बंसल ने स्पष्ट किया कि हिंदू परंपराओं और धार्मिक शब्दावली में 'चंदा' शब्द का कोई स्थान नहीं है, बल्कि यह श्रद्धापूर्वक दिया गया 'दान' है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी के पास गड़बड़ी के वास्तविक प्रमाण हैं, तो वे राजनीति करने के बजाय उसे सीधे जांच एजेंसी को सौंपें।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रुख
राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के 88वें जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित एक गरिमामयी समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विरोधियों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष टीम पूरी पारदर्शिता के साथ मामले की तह तक जा रही है। उन्होंने कहा कि आस्था के इस बड़े केंद्र को बदनाम करने की हर साजिश को नाकाम किया जाएगा और दूध का दूध तथा पानी का पानी होकर रहेगा।
विवाद की पृष्ठभूमि और एसआईटी जांच
इस पूरे विवाद की शुरुआत समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक बयान के बाद हुई थी, जिसमें उन्होंने कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए मंदिर के चढ़ावे से करोड़ों रुपये गायब होने की आशंका जताई थी और मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी। विपक्ष के इन्हीं आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए एसआईटी का गठन किया, जो वर्तमान में आरोपों के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है।

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