नई दिल्ली। भारत में स्थित फिलिस्तीनी दूतावास ने युद्धग्रस्त क्षेत्र में उपजे भयंकर स्वास्थ्य संकट को देखते हुए आपातकालीन स्तर पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विशेष रूप से भारत सरकार से तत्काल दखल देने की गुहार लगाई है। दूतावास द्वारा शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया है कि फिलिस्तीनी क्षेत्रों में स्वास्थ्य ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है और चिकित्सा व्यवस्था ठप होने की कगार पर पहुंच चुकी है। बयान के अनुसार, यह विकट स्थिति इजरायल द्वारा जारी सैन्य अभियानों, अस्पतालों की व्यापक तबाही, जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति पर लगी कड़े प्रतिबंधों और आर्थिक नाकेबंदी का सीधा परिणाम है।
'आरोग्य मैत्री' के तहत मानवीय सहायता और भारत से उम्मीद
फिलिस्तीनी राजनयिक मिशन ने अपने वक्तव्य में भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि हजारों बेकसूर नागरिकों के प्राणों की रक्षा करने का यह अत्यंत निर्णायक समय है। फिलिस्तीन के लोग न्याय और मानवीय संवेदनाओं के लिए भारत की ओर बड़ी उम्मीदों से देख रहे हैं। दूतावास ने भारत सरकार से उसकी प्रसिद्ध 'आरोग्य मैत्री' योजना के अंतर्गत विशेष सहायता भेजने का अनुरोध किया है। उल्लेखनीय है कि इस मानवीय परियोजना की घोषणा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी, जिसके तहत प्राकृतिक आपदाओं अथवा मानवीय त्रासदियों का सामना कर रहे विकासशील राष्ट्रों को आवश्यक चिकित्सीय सामग्रियां और दवाएं उपलब्ध कराने का संकल्प व्यक्त किया गया था।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के डरावने आंकड़े और मलबे की त्रासदी
दूतावास ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न विनियामक संस्थाओं की रिपोर्टों का हवाला देते हुए स्थिति को 'अभूतपूर्व मानवीय संहार' की संज्ञा दी है। संघर्ष के 986वें दिन गाजा पट्टी के 36 प्रमुख अस्पतालों में से केवल 19 चिकित्सालय ही किसी तरह आंशिक रूप से काम कर पा रहे हैं। अस्पतालों के पास जनरेटर चलाने के लिए ईंधन, डायलिसिस किट और रक्त की भारी किल्लत है। इस विभीषिका के बीच, मलबे के नीचे लगभग 12,000 शवों के दबे होने की आशंका है, जिससे गंभीर संक्रामक और चर्म रोग फैल रहे हैं। यह संकट अब वेस्ट बैंक और पूर्वी यरूशलेम तक फैल चुका है, जहां कर राजस्व रोके जाने से वित्तीय व्यवस्था ध्वस्त हो गई है।
दवाइयों का अकाल, टलीं सर्जरियां और 100 मिलियन डॉलर की गुहार
क्षेत्र में दवाओं की अनुपलब्धता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय की अनिवार्य सूची में शामिल 520 आवश्यक दवाओं में से लगभग 180 औषधियां बाजार से पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। कैंसर और ट्यूमर के इलाज के लिए जरूरी 97 दवाओं में से 50 का स्टॉक शून्य हो चुका है, जिससे 4,000 से अधिक कैंसर पीड़ित मरीजों के जीवन पर सीधे मौत का संकट मंडरा रहा है। संसाधनों के अभाव में इस वर्ष 11,000 से ज्यादा निर्धारित ऑपरेशन स्थगित करने पड़े हैं। इस विकराल संकट से निपटने के लिए फिलिस्तीनी दूतावास ने भारत सरकार, भारतीय चिकित्सा संस्थानों और नागरिक समाज से सामूहिक रूप से 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग सौ मिलियन डॉलर) मूल्य की जीवन रक्षक दवाएं तथा सर्जिकल उपकरण आपातकालीन आधार पर उपलब्ध कराने की पुरजोर याचना की है।

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