नई दिल्ली। केंद्र सरकार और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंत्रालय के कड़े रुख के बाद टेक दिग्गज मेटा (Meta) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM), डीपफेक कंटेंट और कंटेंट मॉडरेशन में हुई गंभीर चूकों पर भारत सरकार से माफी मांगी है। 5 अगस्त से शुरू हुई दो दिवसीय बैठक में आईटी मंत्रालय ने मेटा की ग्लोबल टीम को स्पष्ट कर दिया कि वे महज 'मध्यस्थ' (Intermediaries) की श्रेणी में नहीं आते हैं, क्योंकि वे कंटेंट के वितरण को तय करते हैं; इसलिए वे आईटी एक्ट के तहत पूर्ण 'सेफ हार्बर' (Safe Harbour) सुरक्षा के हकदार नहीं हैं।
प्रधानमंत्री के वीडियो को हटाने पर 45 मिनट चली बैठक
बुधवार को आईटी मंत्रालय और मेटा के मुख्य वैश्विक मामलों के अधिकारी जोएल कपलान के नेतृत्व वाली टीम के बीच 45 मिनट लंबी बैठक हुई। इस बैठक में कंटेंट मॉडरेशन की विफलताओं और भारतीय कानूनों के अनुपालन पर विस्तार से चर्चा की गई। मेटा अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पोस्ट किए गए एक सेल्फी वीडियो को गलती से हटाए जाने का कारण स्पष्ट किया और 28 जुलाई को हुई इस तकनीकी गड़बड़ी के लिए औपचारिक रूप से खेद व्यक्त किया।
संसदीय समिति ने दी थी 'सेफ हार्बर' वापस लेने की चेतावनी
संसदीय समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने गृह मंत्रालय और आईटी मंत्रालय को पत्र लिखकर स्पष्ट किया था कि प्रधानमंत्री का वीडियो हटाना किसी थर्ड-पार्टी की नहीं बल्कि प्रकाशक (मेटा) की सीधी जिम्मेदारी है। समिति ने इस विषय पर मार्क जुकरबर्ग को तीन दिनों के भीतर माफी मांगने का निर्देश दिया था और ऐसा न करने की स्थिति में प्लेटफॉर्म को प्राप्त 'सेफ हार्बर' कानूनी सुरक्षा वापस लेने की चेतावनी दी थी। इसके बाद ही मेटा की ग्लोबल टीम ने भारत सरकार के सामने अपना रुख स्पष्ट किया।

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