विभिन्न जिलों में दो हजार से ज्यादा सड़कों के निर्माण के लिए अब प्रदेशवासियों को अक्टूबर तक इंतजार करना होगा। लोक निर्माण विभाग की कार्ययोजना अभी तक तैयार नहीं हो सकी है। इस बीच वर्षा के चलते 6,900 करोड़ रुपये से ज्यादा के कार्य लटके रहेंगे।
विभागीय मंत्री होने के नाते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले सप्ताह समीक्षा बैठक के दौरान कार्ययोजना पर असंतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि सभी विधानसभा क्षेत्रों में विभागीय योजनाओं के तहत कम से कम दो से तीन कार्य जरूर कराए जाएं और सभी विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्यों को पूरी तरजीह दी जाए।
इसके लिए सभी जिलों से 30 जून तक सड़क व अन्य कार्यों के प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए थे।वर्तमान में प्रदेश के 83 राज्य राजमार्गों को चौड़ा करने का काम चल रहा है। इसी प्रकार 38 प्रमुख जिला मार्गों को चौड़ा करने का कार्य किया जा रहा है। 726 अन्य जिला मार्गों व 141 धार्मिक मार्गों को दुरुस्त करने का कार्य भी प्रस्तावित है।
लाजिस्टिक योजना के तहत 21 मार्गों को चौड़ा किया जाना है। इसके अलावा 309 विधानसभा क्षेत्रों में स्थित 1,114 ग्रामीण मार्गों का नवनिर्माण का कार्य प्रस्तावित है। कुल मिलाकर दो हजार से ज्यादा मार्गों के कार्यों पर करीब 6,900 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं।
पिछले वर्ष सात हजार करोड़ रुपये करने पड़े थे सरेंडर
लोक निर्माण विभाग कार्ययोजना में देरी के कारण पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार द्वारा जारी किए गए पूरे बजट का इस्तेमाल ही नहीं कर पाया था। नतीजतन विभाग को 31 मार्च को करीब सात हजार करोड़ रुपये सरेंडर करने पड़े थे। इस बार भी वही स्थिति बनती दिख रही है जबकि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि विकास कार्यों में गुणवत्ता व लेट-लतीफी न हो लेकिन उसका असर विभागीय अधिकारियों पर नहीं दिखाई दे रहा है।

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