September 22, 2026

रिपन शेख और संजीव मंडल पर क्या-क्या आरोप? नड्डा काफिला हमले में पुलिस ने फिर खोली जांच

कोलकाता। पश्चिम बंगाल पुलिस ने दिसंबर 2020 में तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हुए बहुचर्चित हमले के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। दक्षिण 24 परगना जिले से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दो प्रभावशाली नेताओं को गिरफ्तार किया गया है, जिसकी पुष्टि सोमवार को पुलिस अधिकारियों द्वारा की गई। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से अवैध आग्नेयास्त्र (हथियार) भी बरामद किए गए हैं।

मगराहाट से हुई गिरफ्तारी, असामाजिक गतिविधियों में संलिप्तता का आरोप

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों की पहचान रिपन शेख और संजीव मंडल के रूप में हुई है, जिन्हें दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर सब-डिविजन के अंतर्गत मगराहाट पश्चिम इलाके से दबोचा गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने जानकारी दी कि ये दोनों आरोपी इलाके में सक्रिय टीएमसी नेता के तौर पर जाने जाते हैं और लंबे समय से विभिन्न असामाजिक गतिविधियों में लिप्त रहे हैं। उन पर बाइक गैंग के जरिए क्षेत्र में उपद्रव फैलाने के भी गंभीर आरोप हैं। हालांकि पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि 2020 के हमले में उनकी सटीक भूमिका क्या थी, लेकिन वे इस घटना में कथित तौर पर शामिल रहे हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि उनके पास ये हथियार कहां से आए और इस साजिश में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।

दिसंबर 2020 में डायमंड हार्बर जाते समय हुआ था हमला

गौरतलब है कि 10 दिसंबर 2020 को जेपी नड्डा डायमंड हार्बर में एक संगठनात्मक बैठक के लिए जा रहे थे, उसी दौरान उनके काफिले पर दक्षिण 24 परगना जिले में दो अलग-अलग जगहों पर हमला किया गया था। रास्ते में पहले उस्ती के सिराकोल और फिर फलता के दोस्तीपुर इलाके में उनके काफिले को निशाना बनाया गया था। यह पूरा क्षेत्र डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इस हिंसक हमले में जेपी नड्डा की कार को नुकसान पहुंचा था और कई लोग घायल हो गए थे। उस समय नड्डा के साथ भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष और सुकांत मजूमदार भी मौजूद थे।

बढ़ा था तीखा राजनीतिक टकराव

इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारी भूचाल आ गया था। भाजपा ने आरोप लगाया था कि यह हमला टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं के उकसावे पर हुआ है, जबकि टीएमसी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया था। इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे थे। अब इतने वर्षों बाद हुई इस नई गिरफ्तारी से एक बार फिर इस पुराने मामले की जांच तेज हो गई है, और पुलिस हथियारों के स्रोत तथा अन्य संलिप्त लोगों की तलाश में जुटी है।