कोलकाता। पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों (नंदीग्राम और रेजीनगर) पर होने वाले आगामी उपचुनाव को लेकर राज्य का सियासी तापमान काफी बढ़ गया है। नंदीग्राम सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिए जाने के फैसले के बाद वाम दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्ला ने ममता बनर्जी पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा है कि उनमें अब अपने दम पर मैदान में प्रत्याशी उतारने की राजनीतिक क्षमता तक नहीं बची है।
'ममता बनर्जी की स्थिति सड़क पर भीख मांगने वाले जैसी'
सीपीआई (एम) नेता हन्नान मोल्ला ने तीखे शब्दों में कटाक्ष करते हुए कहा कि आज उनकी पार्टी का जनाधार और वजूद ऐसा हो गया है कि उन्हें बिना नाम के ही चुनाव लड़ना पड़ रहा है। ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उनकी मौजूदा स्थिति किसी सड़क पर भीख मांगने वाले व्यक्ति जैसी हो गई है। जब किसी राजनेता पर लाचारी की नौबत आ जाती है, तो उसके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता। उन्होंने पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि जिस नेता ने कभी अतीत में कांग्रेस पार्टी को खंडित किया था, आज मजबूरी में उन्हें उन्हीं के सामने झुकना पड़ रहा है।
1997 के राजनीतिक इतिहास का किया उल्लेख
पूर्व सांसद ने इतिहास को याद दिलाते हुए कहा कि वर्ष 1997 में कांग्रेस को तोड़कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सहयोग और नेतृत्व में ही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का गठन किया गया था। उन्होंने कहा कि आज जब संघ ने भी उन्हें किनारा कर बाहर का रास्ता दिखा दिया है, तो वह सियासी मजबूरी के तहत एक बार फिर कांग्रेस की शरण में जाने को मजबूर हो गई हैं।
हामिद अंसारी के बयान और कांग्रेस की भूमिका पर विचार
इस दौरान हन्नान मोल्ला ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक हालिया बयान पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने इसे उनकी व्यक्तिगत राय करार दिया। देश के मौजूदा राजनीतिक हालातों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि वह विपक्ष के रूप में अपनी ऐतिहासिक और राष्ट्रीय भूमिका का निर्वहन नहीं कर रही है। मोल्ला ने आरोप लगाया कि देश इस समय फासीवाद की चपेट में है, जहाँ लोकतंत्र और संविधान दोनों खतरे में पड़ गए हैं, और हर सरकारी नीति जन-विरोधी साबित हो रही है। ऐसे संकटपूर्ण समय में कांग्रेस का मुख्य कर्तव्य सभी धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एकजुट करना होना चाहिए।
'सब कुछ भूलकर पहले फासीवाद को हराएं'
वामपंथी नेता ने दोटूक शब्दों में कहा कि आज देश के सामने सबसे बड़ी लड़ाई फासीवाद के खिलाफ है। बाकी सभी छोटे-मोटे मुद्दों को दरकिनार कर सबसे पहले फासीवाद को शिकस्त देनी चाहिए, क्योंकि यदि यह ताकत पूरी तरह हावी हो गई तो देश में कोई सुरक्षित नहीं बचेगा। उन्होंने अफसोस जताया कि आज कांग्रेस पार्टी इसी बुनियादी राजनीतिक समझ को खोती जा रही है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर आगामी 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं। शुभेन्दु अधिकारी और हुमायूं कबीर द्वारा अपनी सीटें छोड़ने के कारण इन दोनों सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, जिसके चलते राज्य की राजनीति गरमाई हुई है।

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