दिल्ली | बुधवार को दिल्ली-एनसीआर के मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिला। फरीदाबाद और दिल्ली के वसंत कुंज सहित कई क्षेत्रों में तेज बौछारें पड़ने से लोगों को उमस और गर्मी से बड़ी राहत मिली है। हालांकि, जलभराव और बारिश के कारण सड़कों पर वाहनों की गति धीमी हो गई, जिससे कई स्थानों पर यातायात प्रभावित हुआ।
जून में सुस्ती, जुलाई और अगस्त में रिकॉर्ड तोड़ वर्षा
राजधानी में बीते तीन वर्षों के दौरान मानसून का पैटर्न तेजी से बदला है। अब जून के महीने में प्री-मानसून वर्षा धीमी रहती है, जबकि जुलाई और अगस्त में कम समय के भीतर तेज बारिश के दौर बढ़ गए हैं। साल 2023 में जहां केवल जुलाई में भारी बारिश हुई थी, वहीं 2024 के बाद से जुलाई और अगस्त दोनों महीनों में सामान्य से काफी अधिक जलभराव और वर्षा दर्ज की जा रही है। 2026 में 26 अगस्त तक इन दोनों महीनों की कुल वर्षा 612 मिमी तक पहुंच चुकी है।
इस सीजन का अब तक का आंकड़ा
दिल्ली में अमूमन मानसून 29 जून तक दस्तक देता है, लेकिन इस बार यह 2 जुलाई को पहुंचा। इसके बावजूद बारिश की रफ्तार काफी तेज रही। जुलाई महीने में 258 मिमी और अगस्त में 26 तारीख तक 354.1 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। इस पूरे मानसूनी सीजन की कुल बारिश का आंकड़ा 653.9 मिमी तक पहुंच गया है।
बीते वर्षों की तुलना में बदला रुझान
मौसम के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2023 के जुलाई महीने में 507.1 मिमी रिकॉर्ड बारिश दर्ज की गई थी, जबकि अगस्त का महीना सूखा (91.8 मिमी) रहा था। वहीं 2024 से बारिश का संतुलन बदला और 2025 के अगस्त में 400.1 मिमी पानी बरसा, जो पिछले 15 सालों का सर्वाधिक रिकॉर्ड था। वर्ष 2026 में भी यही ट्रेंड जारी है; जहां 4 से 8 अगस्त के बीच 224.7 मिमी बारिश हुई, वहीं 25 अगस्त को महज 24 घंटे में 99.1 मिमी बारिश दर्ज की गई।

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