भोपाल| भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन के पुत्र अरबाज के विवाह समारोह को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा बनी हुई है। इस मांगलिक अवसर पर मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को भी शरीक होना था, परंतु स्वास्थ्य एवं मौसम संबंधी कारणों से वे बारात में सम्मिलित नहीं हो सकीं। इसके पश्चात उन्होंने शाहनवाज हुसैन और उनके पुत्र अरबाज से जुड़ी एक बेहद भावुक और संस्मरणों से भरी कहानी सोशल मीडिया पर साझा की है, जिसे पढ़कर स्वयं शाहनवाज हुसैन भी अपने आंसू नहीं रोक पाए और भावुक हो उठे।
तीन दशक पुराने संस्मरण और राजनीतिक सफर की यादें
उमा भारती ने अपने संदेश में उस पल को याद किया जब शाहनवाज हुसैन अपने पुत्र के विवाह का निमंत्रण देने वृंदावन आए थे। उन्होंने बताया कि दिसंबर 1993 तक जगत प्रकाश नड्डा युवा मोर्चा के अध्यक्ष थे और उनके उपरांत जब उन्हें यह जिम्मेदारी मिली, तब शाहनवाज उनकी टीम में एक सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत थे। उमा भारती के अनुसार शाहनवाज को शुरुआती दौर में आशंका थी कि नई टीम में उन्हें शायद जगह न मिले, क्योंकि अयोध्या आंदोलन के समय वामपंथी विचारधारा द्वारा ऐसी छवि बनाई गई थी कि वे एक विशेष समुदाय के विरोधी हैं। हालांकि, शाहनवाज की कार्यकुशलता और लगन को देखते हुए उन्हें पहले कार्यालय प्रभारी, फिर राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया और बाद में वे लोकसभा चुनाव जीतकर मात्र बत्तीस वर्ष की अल्पायु में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बने।
विवाह का सुझाव, पारिवारिक रिश्ते और फूफी की भूमिका
उमा भारती ने अपने संस्मरणों में यह भी उजागर किया कि शाहनवाज ने अपनी जीवनसंगिनी रेनू शर्मा के विषय में सबसे पहले उन्हीं से चर्चा की थी। उस समय उन्होंने ही दोनों को अपने-अपने धर्म का सम्मान करते हुए विवाह बंधन में बंधने का सुझाव दिया था, जिसके उपरांत दोनों परिवारों ने इस रिश्ते को सहर्ष स्वीकार कर लिया। जब अरबाज का जन्म हुआ, तो उनके आवास पर उत्सव जैसा माहौल था जिसमें दिवंगत साहब सिंह वर्मा भी शामिल हुए थे। उमा भारती ने बताया कि आगामी छब्बीस अक्टूबर की शाम को आयोजित निकाह समारोह में उन्हें फूफी का फर्ज निभाते हुए सम्मिलित होना था। वे पच्चीस तारीख को माइनस तीन डिग्री तापमान वाले केदारनाथ से सीधे भीषण गर्मी वाले वृंदावन पहुंची थीं, जिसके कारण उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया और वे दिल्ली नहीं पहुंच सकीं। इस बात का मर्मस्पर्शी अफसोस जताते हुए उन्होंने कहा कि बत्तीस वर्षों के इस भाई-बहन के पवित्र रिश्ते में वे बांके बिहारी जी से नवदंपति की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं।
उमा भारती के संदेश पर शाहनवाज हुसैन की भावुक प्रतिक्रिया
उमा भारती द्वारा लिखे गए इस भावुक पत्र को पढ़ने के बाद शाहनवाज हुसैन अत्यधिक भावुक हो गए। उन्होंने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विगत बत्तीस वर्षों का साथ, उमा जी का स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद उनके पूरे परिवार के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि पुत्र के विवाह में उनकी अनुपस्थिति बहुत खली, लेकिन उन्हें पूर्ण विश्वास है कि बड़ी बहन का आशीर्वाद सदा उनके साथ रहेगा। शाहनवाज हुसैन ने उनसे यह भी आग्रह किया कि जब भी वे दिल्ली आएं, तो नवदंपति को आशीर्वाद देने उनके निवास पर अवश्य पधारें, क्योंकि वे केवल उनकी दीदी ही नहीं बल्कि पूरे परिवार की गार्जियन और अभिभावक हैं।

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