जयपुर। जयपुर शहर की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए लागू की गई 'ट्रैफिक मार्शल योजना' अब संकट और विवादों के घेरे में है। इस योजना के तहत तैनात युवाओं ने शासन और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। मार्शलों का कहना है कि उन्हें पिछले चार महीनों से मानदेय (वेतन) नहीं दिया गया है और अब उन्हें अचानक काम से निकाला जा रहा है।
वेतन की कमी और मौखिक बर्खास्तगी का आरोप
ट्रैफिक मार्शल के रूप में सेवा दे रहे युवाओं का दर्द है कि उन्हें बिना किसी आधिकारिक नोटिस के हटाया जा रहा है।
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अजीत सिंह (चौमू): इनका कहना है कि पूर्व ट्रैफिक डीसीपी के समय हुई नियुक्तियों को अब नए अधिकारियों के आने के बाद बदला जा रहा है। हटाने की पूरी प्रक्रिया केवल मौखिक आदेशों पर चल रही है।
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आर्थिक संकट: भरतपुर के अरुण सिनसिनवार और अलवर की रहने वाली छात्रा पूजा ने बताया कि उन्होंने अपनी पढ़ाई और दैनिक खर्चों के लिए यह नौकरी जॉइन की थी। फरवरी से अब तक एक भी पैसा न मिलने के कारण उनके सामने रहने और खाने का संकट खड़ा हो गया है।
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रिकॉर्ड में हेरफेर: सविता कुमारी ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि ड्यूटी पर होने के बावजूद उनकी उपस्थिति (Attendance) दर्ज नहीं की जा रही है और संवाद के लिए बनाए गए आधिकारिक ग्रुप भी बंद कर दिए गए हैं।
पूर्व मंत्री खाचरियावास का सरकार पर हमला
पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया।
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जाम की समस्या: उन्होंने कहा कि जयपुर के सी-स्कीम, सिविल लाइंस और 200 फीट रोड जैसे प्रमुख क्षेत्रों में जनता घंटों जाम से जूझ रही है। ऐसे में मार्शल को हटाना समझ से परे है।
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मांग: खाचरियावास ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की कमी को देखते हुए मार्शलों की संख्या बढ़ानी चाहिए थी और उनके साथ होमगार्ड्स की भी तैनाती की जानी चाहिए थी।
क्या थी ट्रैफिक मार्शल योजना?
दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों की तर्ज पर जयपुर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए यह पहल शुरू की गई थी।
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स्वीकृत पद: कुल 1419 पदों में से 1009 पद अकेले जयपुर के लिए तय किए गए थे।
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योग्यता: इसके लिए 10वीं पास और ड्राइविंग लाइसेंस धारक युवाओं को चुनकर प्रशिक्षण दिया गया था।
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मानदेय: 20 जनवरी से शुरू हुई इस ड्यूटी के लिए युवाओं को 6000 रुपये प्रति माह का मानदेय मिलना तय हुआ था।

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