डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकती हैं आपकी ये अनजानी गलतियां, आज ही सुधारें

डायबिटीज दुनिया भर में तेजी से पैर पसार रही एक बेहद गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। आज के दौर में बच्चे हों, युवा हों या बुजुर्ग—हर उम्र के लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। शरीर में ब्लड शुगर (रक्त शर्करा) के स्तर को अनियंत्रित होने से बचाने के लिए खानपान की आदतों और जीवनशैली दोनों में सुधार करना बेहद जरूरी माना जाता है। इस बीमारी में हमारे आहार की भूमिका सबसे मुख्य होती है, क्योंकि हम पूरे दिन में जो कुछ भी खाते-पीते हैं, उसका सीधा असर हमारे शुगर लेवल पर दिखाई देता है।

गलत खानपान, घंटों तक एक ही जगह बैठे रहने की आदत, अत्यधिक मानसिक तनाव, भोजन का कोई निश्चित समय न होना और अस्त-व्यस्त दिनचर्या डायबिटीज को काबू में करने के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बनती हैं। यही वजह है कि चिकित्सा विशेषज्ञ केवल दवाइयों के भरोसे रहने के बजाय मरीजों को एक संतुलित आहार चार्ट अपनाने, रोजाना कसरत करने और अपनी लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने पर जोर देते हैं।

यदि आप मधुमेह से पीड़ित हैं या इसके शुरुआती लक्षणों से जूझ रहे हैं, तो यह जानना जितना जरूरी है कि थाली में क्या होना चाहिए, उतना ही यह समझना भी आवश्यक है कि किन आदतों को तुरंत छोड़ देना चाहिए। आइए जानते हैं उन रोजमर्रा की चूकों के बारे में जो आपके शुगर लेवल को अचानक बढ़ा सकती हैं।

केवल मीठे से तौबा करना काफी नहीं, फास्ट फूड को भी कहें अलविदा

अक्सर लोगों के मन में यह गलतफहमी होती है कि डायबिटीज होने पर सिर्फ चीनी, चाय और मिठाइयों से दूरी बना लेना ही काफी है, जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है:

  • बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज, प्रोसेस्ड चिप्स और बाजार में मिलने वाले पैकेटबंद खानों में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट (मैदा), नुकसानदेह फैट और छिपी हुई शुगर (हिडन शुगर) की मात्रा बहुत ज्यादा होती है।

  • इन चीजों का लगातार सेवन करने से न सिर्फ ब्लड शुगर का संतुलन बिगड़ता है, बल्कि मोटापा भी बढ़ता है, जिससे शरीर में इंसुलिन हार्मोन की कार्यक्षमता कमजोर होने लगती है।

  • इसलिए अपनी डाइट में हमेशा ताजे, घर के बने पौष्टिक और संतुलित भोजन को शामिल करें और सही समय पर खाना खाने का नियम बनाएं।

घंटों तक एक ही जगह बैठे रहना भी सेहत के लिए बड़ा खतरा

शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा है। जब हम अपने शरीर को हिलाते-डुलाते हैं या कोई शारीरिक श्रम करते हैं, तो हमारी मांसपेशियां खून में मौजूद ग्लूकोज का ऊर्जा के रूप में बेहतर इस्तेमाल कर पाती हैं, जिससे इंसुलिन सेंसिटिविटी में काफी सुधार होता है।

इसके विपरीत, दिनभर कुर्सी या सोफे पर बैठे रहने और बिल्कुल भी एक्सरसाइज न करने से शुगर लेवल को मेंटेन करना बेहद मुश्किल हो जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, हर व्यक्ति को रोजाना कम से कम 30 मिनट तक वॉक, रनिंग या कोई न कोई फिजिकल एक्टिविटी जरूर करनी चाहिए। नियमित रूप से व्यायाम करने से वजन भी काबू में रहता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा काफी हद तक टल जाता है।

अत्यधिक मानसिक तनाव भी अचानक बढ़ा देता है शुगर का ग्राफ

ज्यादा चिंता या मानसिक तनाव सिर्फ हमारे मूड को ही खराब नहीं करता, बल्कि पूरे शरीर के सिस्टम को हिलाकर रख देता है। जब हम गहरे तनाव में होते हैं, तो शरीर में कॉर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स का लेवल तेजी से बढ़ने लगता है। ये हार्मोन्स शरीर में इंसुलिन के असर को बेअसर कर देते हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल अचानक से शूट-अप (बढ़) हो जाता है। यही कारण है कि डायबिटीज के मरीजों के लिए दवाओं के साथ-साथ मानसिक शांति भी इलाज का एक बेहद जरूरी हिस्सा है।

तनाव से मुक्ति पाने और मन को शांत रखने के लिए नियमित रूप से योग, ध्यान (मेडिटेशन), गहरी सांस लेने वाले प्राणायाम (ब्रीदिंग एक्सरसाइज) और हर रात 7-8 घंटे की भरपूर नींद लेना बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।