लखनऊ
कृषि क्षेत्र में तकनीक को बढ़ावा दे रही प्रदेश सरकार फसलों की सुरक्षा के लिए नया कदम उठाने जा रही है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अब तकनीक आधारित उपज आकलन प्रणाली (यस-टेक) को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके साथ ही पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (आरडब्ल्यूबीसीआईएस) के तहत फसलों की निगरानी व रखरखाव की प्रक्रिया को भी दुरुस्त किया जाएगा। यस-टेक प्रणाली के माध्यम से ग्राम पंचायत स्तर पर उपज का सटीक आकलन संभव होगा। किसानों को फसलों का बीमा उपलब्ध कराने और ग्राम पंचायत स्तर पर फसलों के निरीक्षण की प्रक्रिया को और सुदृढ़ बनाने के लिए भी यस-टेक प्रणाली का उपयोग किया जाएगा।
टीआईपी की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू
यस टेक को लागू करने के लिए प्रौद्योगिकी कार्यान्वयन भागीदार (टीआईपी) की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कृषि विभाग ने प्रदेश के 75 जिलों में रबी व खरीफ की फसलों से संबंधित आंकड़ों के संकलन को लेकर इस प्रक्रिया की शुरुआत कर रहा है। फिलहाल, गेहूं व धान की फसलों पर फोकस किया जा रहा। प्रधानमंत्री फसल बीमा का लाभ सभी किसानों को मिले इस उद्देश्य से फसलों को ग्राम पंचायत स्तर पर बीमित करने और किसानों को बीमा कवर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
बीमा की अंतिम तिथि निर्धारित
वहीं, पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के जरिए भी किसानों को लाभान्वित किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस प्रक्रिया में बीमित खरीफ फसल के तौर पर केला, मिर्च व पान और रबी फसल के तौर पर टमाटर, शिमला मिर्च, हरी मटर व आम को वरीयता दी गई है। केले के लिए 30 जून, मिर्च के लिए 31 जुलाई, पान के लिए 30 जून, टमाटर, शिमला मिर्च व हरी मटर के लिए 30 नवंबर और आम के लिए फसलवार बीमा कराने की अंतिम तिथि 15 दिसंबर निर्धारित की गई है।

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