लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ सीधे तौर पर जोड़ने वाली अत्यंत महत्वपूर्ण 'गोरखपुर-शामली ग्रीनफील्ड हाईवे' परियोजना के कार्य में अब काफी तेजी आ गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के एक प्रमुख हिस्से की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर अंतिम स्वीकृति के लिए दिल्ली स्थित मुख्य मुख्यालय को भेज दी है। सब कुछ तय योजना के अनुसार चला, तो इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए आगामी नवंबर-दिसंबर माह तक आधिकारिक रूप से टेंडर आमंत्रित किए जाने की पूरी संभावना है।
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के पास रामपुर गांव में होगा समापन
लगभग 700 किलोमीटर लंबा यह विशाल ग्रीनफील्ड हाईवे उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और पश्चिम अंचल को आपस में पिरोएगा। यह नया मार्ग प्रदेश के कुल 19 महत्वपूर्ण जिलों से होकर गुजरेगा, जिसके बनने से न केवल आम जनजीवन के लिए यातायात अत्यधिक सुगम और आरामदायक होगा, बल्कि व्यापार, औद्योगिक गतिविधियों तथा कृषि उत्पादों के परिवहन में भी एक ऐतिहासिक और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।
इस एक्सप्रेसवे का पहला चरण शामली जिले से आरंभ होकर शाहजहांपुर में स्थित शाहजहांपुर-खुटार हाईवे (NH-731) के पुवायां क्षेत्र में समाप्त होगा। वहीं, इसका दूसरा चरण गोरखपुर जिले में निर्माणाधीन 'गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे' के पास स्थित रामपुर गांव में जाकर समाप्त होगा।
किन-किन जिलों से होकर गुजरेगा यह हाईवे?
यह अत्याधुनिक हाईवे उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्य के कुल 20 प्रशासनिक क्षेत्रों से गुजरेगा। इनमें उत्तर प्रदेश के शामली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, संत कबीरनगर, गोरखपुर और कुशीनगर के अलावा उत्तराखंड राज्य का हरिद्वार जिला भी शामिल है। इस पूरी परियोजना के निर्माण कार्य पर लगभग 35,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत आने का अनुमान है। इस एक्सप्रेसवे के धरातल पर उतर जाने से गोरखपुर से शामली तथा आगे चलकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली व संपूर्ण एनसीआर क्षेत्र तक का सफर तय करने में लगने वाले समय में भारी कमी आएगी।
समय पर पूरा होने पर साबित होगा बड़ा 'गेमचेंजर'
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आगामी नवंबर-दिसंबर के दौरान इस हाईवे के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो जाएगी। यह पूरा हाईवे एक 'ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट' होगा, जिसके तहत पहले नई जमीनों का अधिग्रहण किया जाएगा और फिर बिल्कुल नए सिरे से सड़क का निर्माण किया जाएगा। राजनीतिक और आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि यह बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना निर्धारित समय के भीतर धरातल पर उतरती हुई दिखाई देती है, तो यह आने वाले समय में एक बहुत बड़ा राजनीतिक और विकासात्मक 'गेमचेंजर' साबित हो सकती है।

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