August 15, 2026

CM योगी बोले- गाय को सिर्फ पशु मानना ठीक नहीं, यह हमारी आस्था और संस्कृति का हिस्सा है

अयोध्या: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को स्थानीय दिगंबर अखाड़े में आयोजित एक संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए गो संरक्षण, भारतीय सनातन परंपरा और देश के इतिहास पर खुलकर अपने विचार रखे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गाय को केवल एक साधारण पशु नहीं माना जा सकता, क्योंकि हमारी सनातन संस्कृति और परंपरा में गाय को सीधे तौर पर 'माता' का दर्जा प्राप्त है। इस दौरान उन्होंने कुछ मौलवियों द्वारा गाय को 'राष्ट्रीय पशु' घोषित करने की मांग से जुड़ा एक ज्ञापन सौंपे जाने का जिक्र किया और उस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि गाय हमारी श्रद्धा में माता है, केवल एक राष्ट्रीय पशु भर नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के बहुसंख्यक हिंदू समाज को यह सिखाने की कतई आवश्यकता नहीं है कि गोमाता की पूजा या सेवा किस प्रकार की जाती है। उन्होंने खुलासा किया कि कुछ दिन पूर्व उनके पास भी एक ज्ञापन आया था, जिसमें गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने की मांग उठाई गई थी। उस ज्ञापन में गाय के लिए 'पशु' शब्द का इस्तेमाल किया गया था, जिस पर उन्होंने आपत्ति जताते हुए तुरंत संबंधित मौलवियों से बातचीत की थी।

'यह केवल भूल थी या कोई सोची-समझी शरारत?'

मुख्यमंत्री के अनुसार, जब उन्होंने उन लोगों से सवाल किया कि हमारी सनातन परंपरा में परम पूजनीय गोमाता के लिए 'पशु' जैसे शब्द का प्रयोग क्यों किया गया, तो उन्हें जवाब मिला कि यह अनजाने में हुई एक गलती है। इस पर मुख्यमंत्री ने उनसे दो टूक पूछा कि क्या यह वाकई केवल एक सामान्य भूल थी या फिर बार-बार दोहराई जाने वाली कोई सोची-समझी शरारत है।

मुख्यमंत्री योगी ने जोर देकर कहा कि गाय केवल सनातन धर्म की ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत की प्राचीन और महान सांस्कृतिक धरोहर है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है—'गावो विश्वस्य मातरः', जिसका शाब्दिक भाव यही है कि गाय पूरे संसार की माता है। हिंदू समाज के संस्कारों में गोमाता का स्थान सर्वोपरि है और हमारे यहां कोई भी मांगलिक या शुभ कार्य गो पूजन के बिना कभी भी पूर्ण नहीं माना जाता है।

'यदि उस समय मोदी जैसा नेतृत्व होता, तो लाखों हिंदुओं का कत्लेआम नहीं होता'

शुक्रवार को दिगंबर अखाड़ा परिसर में राम जन्मभूमि आंदोलन के अग्रणी महानायक ब्रह्मलीन महंत रामचंद्र दास परमहंस की 23वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित एक विशाल श्रद्धांजलि समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने देश के विभाजन, राम मंदिर के लंबे संघर्ष और वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को लेकर कांग्रेस तथा समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखे राजनीतिक हमले किए।

उन्होंने आक्रामक अंदाज में कहा कि यदि वर्ष 1947 में देश के विभाजन के समय कांग्रेस पार्टी वैचारिक और राजनीतिक रूप से पूरी दृढ़ता के साथ खड़ी होती, तो भारत का अवांछित विभाजन कभी नहीं होता। इसके साथ ही उन्होंने बड़ा बयान देते हुए कहा कि यदि उस दौर में देश को देशलौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल या वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा मजबूत और दूरदर्शी नेतृत्व मिल गया होता, तो देश के बंटवारे के वक्त होने वाले भीषण दंगों में लाखों निर्दोष हिंदुओं का ऐसा दर्दनाक कत्लेआम कभी नहीं होता।

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने स्मरण किया कि ब्रह्मलीन महंत रामचंद्र दास परमहंस का पूरा जीवन केवल और केवल श्रीराम जन्मभूमि पर एक भव्य और दिव्य मंदिर के निर्माण के संकल्प को ही समर्पित था। कांग्रेस पर करारा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि देश के विभाजन के समय तत्कालीन नेताओं द्वारा लिए गए अदूरदर्शी राजनीतिक निर्णयों का भयंकर दुष्परिणाम देश की कई पीढ़ियों को भुगतना पड़ा है। यदि उस ऐतिहासिक कालखंड में देश के पास एक सशक्त और दृढ़ नेतृत्व होता, तो देश के विभाजन और उसके बाद हुई व्यापक हिंसा जैसी अमानवीय परिस्थितियों को आसानी से टाला जा सकता था।