वैशाली। बिहार के वैशाली जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ बेलसर थाना अंतर्गत मिश्रौलिया गाँव में बुधवार की सुबह एक युवक का शव आम के पेड़ से लटका हुआ पाया गया। सुबह-सुबह इस खबर के फैलते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और घटनास्थल पर ग्रामीणों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। मृतक की शिनाख्त मिश्रौलिया निवासी विनोद मिश्रा के 35 वर्षीय बेटे कुंदन कुमार के तौर पर की गई है। इस घटना के बाद से पूरे गाँव में सन्नाटा और दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुँची पुलिस ने मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है।
रात में कुछ लोगों के साथ देखा गया था युवक
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कुंदन कुमार गाँव से थोड़ी दूरी पर एक एकांत जगह में मुर्गी फार्म चलाता था और अक्सर रात के समय वहीं रुकता था। बताया जा रहा है कि मंगलवार की रात को भी उसे कुछ लोगों के साथ पोल्ट्री फार्म पर देखा गया था। लेकिन अगली सुबह उसका शव गाँव के पास ही एक बगीचे में पेड़ से झूलता मिला। कुंदन शादीशुदा था, मगर पारिवारिक विवाद और अनबन के चलते काफी समय से अपनी पत्नी से अलग रह रहा था। घटना की भनक लगते ही रोते-बिलखते परिजन भी मौके पर पहुँच गए, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है।
फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को बुलाया गया, पुलिस जाँच में जुटी
वारदात की जानकारी मिलते ही प्रभारी थाना अध्यक्ष मनीष कुमार दलबल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने फौरन शव को अपने नियंत्रण में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है। कानून व्यवस्था बनाए रखने और सुराग तलाशने के लिए पुलिस टीम ने मौके का गहन मुआयना किया। मामले के पेचीदा होने के कारण साक्ष्य जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर तलब किया गया है।
हत्या या आत्महत्या? गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस
इस घटना को लेकर गाँव के भीतर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इलाके का एक धड़ा जहाँ इसे सुसाइड मान रहा है, वहीं दूसरी ओर भारी संख्या में ग्रामीण इसे सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या करार दे रहे हैं। फिलहाल, मौत की असली वजह क्या है, इसे लेकर सस्पेंस बना हुआ है।
थाना प्रभारी मनीष कुमार ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि पुलिस हर एंगल को खंगाल रही है। केस की जाँच मर्डर और सुसाइड, दोनों ही बिंदुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। पीड़ित परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और फॉरेंसिक लैब की वैज्ञानिक जाँच रिपोर्ट के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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