सूरत मेट्रो का काउंटडाउन: ड्रीम सिटी से अल्थान के बीच पटरियों पर दौड़ी ट्रेन, ट्रायल रन शुरू।

सूरत | अहमदाबाद और गांधीनगर की तर्ज पर अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य का प्रमुख औद्योगिक केंद्र सूरत भी जल्द ही मेट्रो रेल के नक्शे पर नजर आने वाला है। गुजरात मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (GMRC) ने शहर के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ड्रीम सिटी और अल्थान टेनमेंट के बीच स्थित 8.5 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर पर परीक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस रूट के सफलतापूर्वक संचालित होने के बाद, दुनिया के सबसे बड़े ऑफिस स्पेस 'सूरत डायमंड बोर्स' के लिए आवाजाही बेहद सुगम हो जाएगी। मेट्रो प्रशासन के अनुसार, इस ट्रैक पर परिचालन की अंतिम मंजूरी से पहले 500 घंटे से अधिक का सघन परीक्षण किया जाएगा, जिसमें मेट्रो की गति, आधुनिक ब्रेकिंग सिस्टम और अन्य तकनीकी सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच होगी। रेल संरक्षा आयुक्त से हरी झंडी मिलने के बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा, जिससे शहर के यातायात के बोझ में भारी कमी आने की उम्मीद है।

विशेष रूप से, यह परियोजना सूरत की पहचान माने जाने वाले हीरा और कपड़ा उद्योग के लिए मील का पत्थर साबित होगी। मेट्रो के शुरू होने से वराछा, कतरगाम और सारथाना जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों से 'सूरत डायमंड बोर्स' आने-जाने वाले लगभग 45,000 कारीगरों और व्यापारियों को सीधा लाभ मिलेगा। यह न केवल उनके समय की बचत करेगा, बल्कि उन्हें परिवहन का एक तेज, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल साधन भी प्रदान करेगा। पूरी सूरत मेट्रो परियोजना को दो प्रमुख गलियारों (कॉरिडोर) में बांटा गया है। पहला 'डायमंड कॉरिडोर' सारथाना को ड्रीम सिटी से जोड़ता है, जिसमें एलिवेटेड और अंडरग्राउंड दोनों तरह के ट्रैक शामिल हैं। वहीं, दूसरा 'टेक्सटाइल कॉरिडोर' भेसान से सरोली के बीच पूरी तरह से एलिवेटेड रूट पर बनाया गया है। कुल 40.35 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना और इसके 38 स्टेशनों के चालू होने से सूरत की वैश्विक पहचान और अधिक सुदृढ़ होगी।