जबलपुर | मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने मंडला जिले की पुलिस कार्यप्रणाली पर तीखी नाराजगी व्यक्त की है। पूरा मामला एक गंभीर अपराध में सजा काट रहे कैदी की पैरोल अर्जी से जुड़ा है। दरअसल, एक अपराधी ने अपने परिवार में होने वाले मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन पुलिस की तरफ से पेश किए गए दस्तावेजों में इतनी बड़ी विसंगति निकली कि जजों ने एसपी की कार्यशैली पर ही सवाल उठा दिए।
दस्तावेजों में हेरफेर: भाई की जगह कैदी को ही बना दिया दूल्हा
जेल में बंद दुष्कर्म के अपराधी अन्नू आदिवासी ने आवेदन दिया था कि 17 अप्रैल को उसके सगे भाई का विवाह है, इसलिए उसे कुछ दिनों की अस्थायी राहत दी जाए। अदालत ने जब इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित पुलिस थाने से जानकारी मांगी, तो वहां से आई रिपोर्ट ने सबको हतप्रभ कर दिया। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख कर दिया कि 18 अप्रैल को खुद अन्नू आदिवासी की ही शादी होने वाली है।इस भारी चूक पर जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस ए.के. सिंह की खंडपीठ ने कड़ा संज्ञान लिया। कोर्ट ने मंडला एसपी को फटकार लगाते हुए पूछा कि "क्या पुलिस विभाग में जिम्मेदार पद पर बैठे अफसर कागजों को पढ़े बिना ही उन पर मुहर लगा देते हैं?"
एसपी की माफी और अदालत की अंतिम चेतावनी
अदालत के सख्त रुख को देखते हुए एसपी ने व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर अपनी गलती स्वीकार की और बिना किसी शर्त के माफी मांगी। बेंच ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि भविष्य में प्रशासनिक स्तर पर ऐसी लापरवाही को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। हालांकि, एसपी की क्षमायाचना के बाद कोर्ट ने दोषी को भाई के विवाह में शामिल होने के लिए कुछ शर्तों के साथ इजाजत दे दी। कोर्ट के आदेशानुसार, आरोपी को समारोह संपन्न होने के बाद 20 अप्रैल तक वापस जेल प्रशासन के समक्ष समर्पण करना होगा।

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