मुंबई। वैश्विक स्तर पर कमजोर संकेतों और चौतरफा मुनाफावसूली के चलते भारतीय शेयर बाजार के लिए सप्ताह का पहला दिन बेहद निराशाजनक रहा। सोमवार 8 जून 2026 के कारोबारी सत्र में चारों तरफ 'रिस्क-ऑफ' (जोखिम से बचने) की भावना हावी रही, जिसके कारण प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी भारी गिरावट के साथ धड़ाम हो गए। इस बिकवाली का असर केवल भारतीय बाजारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समूचे एशियाई और यूरोपीय शेयर बाजारों को भी अपनी चपेट में ले लिया। सुबह से ही बाजार पर भालुओं (बिकवाली) का दबदबा देखने को मिला, जिससे निवेशकों में घबराहट फैल गई।
सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट और रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स एक समय 700 अंकों से भी अधिक टूट गया था, लेकिन सत्र के आगे बढ़ने पर यह 645.51 अंक (-0.86%) की गिरावट के साथ 73,597.83 के स्तर पर आ गया। दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 199.80 अंक (-0.86%) की कमजोरी दर्ज करते हुए 23,166.90 के स्तर पर खिसक गया। बिकवाली के इस प्रचंड दौर में निफ्टी ने 23,150 का महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर भी तोड़ दिया। इस बीच, घरेलू मुद्रा रुपये पर भी चौतरफा दबाव दिखा और अमेरिकी डॉलर की मजबूती व वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण रुपया 17 पैसे टूटकर 95.35 प्रति डॉलर के भाव पर पहुंच गया। बाजार के सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी, ऑटो, मेटल और रियल्टी इंडेक्स में सबसे ज्यादा बिकवाली हुई, जबकि फार्मा, हेल्थकेयर और मीडिया जैसे डिफेंसिव सेक्टर्स ने मामूली बढ़त के साथ बाजार को संभालने का असफल प्रयास किया।
पश्चिम एशिया का बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग
बाजार के जानकारों के मुताबिक, इस भारी गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में गहराता भू-राजनीतिक संकट है। लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान द्वारा इजरायल पर मिसाइलें दागे जाने से युद्ध के आसार और गंभीर हो गए हैं। इस वैश्विक तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) का भाव 3.51 फीसदी के तगड़े उछाल के साथ 96.36 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जो भारत जैसे आयातक देश के लिए बड़ा झटका है। हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से शांति वार्ताओं को बचाने की अपील करते हुए जवाबी कार्रवाई न करने को कहा है और ईरान को भी बातचीत के मंच पर आने का आग्रह किया है।
एआई रैली का थमना और विदेशी फंड्स की ताबड़तोड़ बिकवाली
युद्ध के संकट के साथ-साथ अमेरिकी बाजारों में टेक्नोलॉजी शेयरों की 'AI-आधारित रैली' का अचानक थम जाना भी मंदी का एक बड़ा कारण बना। अमेरिकी टेक इंडेक्स नैस्डैक में आई 4.18 प्रतिशत की भारी गिरावट का सीधा असर एशियाई बाजारों पर देखने को मिला। इसके चलते दक्षिण कोरिया के मुख्य सूचकांक 'कोस्पी' में लगभग 8 फीसदी की ऐतिहासिक गिरावट आई, जिसके बाद वहां कुछ समय के लिए ट्रेडिंग (सर्किट) रोकनी पड़ गई। इसके अलावा, वैश्विक बाजारों में मची इस तबाही के बीच जापान का निक्केई 4.2% और टोपिक्स 2.7% तक टूट गए, जबकि हांगकांग और चीन के बाजारों में भी 1 से 1.3% की गिरावट रही। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भी भारतीय बाजार से शुक्रवार को 8,776.25 करोड़ रुपये के शेयरों की भारी-भरकम बिकवाली की, जिससे घरेलू निवेशकों का मनोबल पूरी तरह टूट गया।

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