नई दिल्ली। देश के असंगठित क्षेत्र के गैर-कृषि उद्यमों में से लगभग आधे अभी भी इंटरनेट की पहुंच से कोसों दूर हैं। हालांकि, तकनीक अपनाने के मामले में हिमाचल प्रदेश सबसे अग्रणी राज्य बनकर उभरा है, जिसके बाद हरियाणा और असम का स्थान आता है। दूसरी तरफ, इन छोटे और असंगठित उद्यमों में काम करने वाले श्रमिकों को सबसे अधिक पारिश्रमिक (मजदूरी) देने के मामले में उत्तराखंड देश में शीर्ष पर है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) रिसर्च द्वारा किए गए 'एएसयूएसई 2025' यूनिट-लेवल विश्लेषण में यह महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं, जो यह साबित करते हैं कि कारोबार के बेहतर प्रदर्शन के लिए डिजिटल तकनीक कितनी आवश्यक है। इस अध्ययन के अनुसार, साल 2025 में देश के सभी राज्यों में व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इंटरनेट का चलन पहले के मुकाबले काफी बढ़ा है।
डिजिटलाइजेशन से श्रम उत्पादकता में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2022-23 में केवल 21 फीसदी और 2023-24 में 27 प्रतिशत असंगठित उद्यम इंटरनेट का इस्तेमाल करते थे, जो अब तेजी से बढ़कर 39 फीसदी पर पहुंच गया है। अकेले हिमाचल प्रदेश में यह आंकड़ा 68.2 प्रतिशत दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि जो उद्यम इंटरनेट और डिजिटल तकनीकों का उपयोग करते हैं, उनकी श्रम उत्पादकता में 76 प्रतिशत तक का तगड़ा उछाल आता है। देश की अर्थव्यवस्था में रोजगार पैदा करने और आजीविका चलाने के लिए यह क्षेत्र बेहद अहम माना जाता है। इसके अलावा, आईटी (IT) तकनीकों को अपनाने से इन अनौपचारिक फर्मों के आधिकारिक पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराने की संभावना भी औसतन 84% तक बढ़ जाती है।
उद्यमों के विकास के लिए प्रभावी रोडमैप की सिफारिश
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में इस क्षेत्र को मुख्यधारा में लाने के लिए एक विशेष कार्ययोजना लागू करने का सुझाव दिया गया है। इसके तहत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए व्यापारियों को स्थानीय भाषाओं में ऑनलाइन भुगतान, बहीखाता प्रबंधन, डिजिटल मार्केटिंग और सरकारी पंजीकरण के संबंध में व्यावहारिक ज्ञान देने की बात कही गई है। इसके साथ ही, नव-औपचारिकीकृत सूक्ष्म फर्मों (माइक्रो फर्म्स) के लिए कागजी और कानूनी अनुपालन की लागत को कम करने की वकालत की गई है, ताकि छोटे कारोबारी बिना किसी वित्तीय बोझ के डिजिटल व्यवस्था से जुड़ सकें और आगे बढ़ सकें।
ऋण सुविधा, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और महिला सशक्तिकरण पर जोर
छोटे व्यापारियों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए उनके डिजिटल लेनदेन के इतिहास (ट्रांजैक्शन हिस्ट्री) को आधार बनाकर नकदी प्रवाह-आधारित ऋण (क्रेडिट) देने की नीति को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, लघु उद्यमों को बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक पहुंच देने और स्थानीय डिजिटल मार्केटप्लेस के माध्यम से उनकी बिक्री बढ़ाने में सहायता करने का प्रस्ताव रखा गया है। रिपोर्ट में इस बात पर विशेष बल दिया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे, महिलाओं के स्वामित्व वाले और बेहद छोटे स्तर के कुटीर उद्योगों का प्राथमिकता के आधार पर डिजिटलाइजेशन किया जाना चाहिए, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुंच सके।

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