राजभवन के आदेश से रादुविवि में बढ़ी हलचल, धारा 52 लगाने की तैयारी

जबलपुर: मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली में सामने आई व्यापक गड़बड़ियों और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों पर राजभवन ने बेहद सख्त रवैया अपनाया है। राज्यपाल सचिवालय ने विश्वविद्यालय के संपूर्ण प्रशासनिक कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने के निर्देश सीधे तौर पर राज्य के उच्च शिक्षा विभाग को सौंप दिए हैं। इसके साथ ही राजभवन ने वर्तमान कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करते हुए विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत धारा 52 लागू किए जाने के संबंध में आवश्यक और त्वरित कदम उठाने के स्पष्ट आदेश जारी कर दिए हैं, जिससे पूरे शैक्षणिक जगत में सनसनी फैल गई है।

धारा 52 लागू करने के लिए शासन को पहली बार मिले सीधे निर्देश

यह अपने आप में एक बेहद महत्वपूर्ण और अनूठा मौका माना जा रहा है जब राजभवन की ओर से सीधे तौर पर धारा 52 की कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग को इतने कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। राज्यपाल के उप सचिव कार्यालय से एक आधिकारिक पत्र जारी कर मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को इस पूरे मामले में तत्काल प्रभाव से नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई करने के लिए अधिकृत किया गया है, जिसके बाद से विश्वविद्यालय के प्रशासनिक हल्कों में बैठकों और चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

बीती 20 जून को मिली विस्तृत शिकायत ने हिला दी पूरी व्यवस्था

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरी उच्च स्तरीय कार्रवाई की नींव बीती 20 जून को राजभवन को प्राप्त हुए एक विस्तृत और गंभीर शिकायत पत्र के बाद पड़ी। इस शिकायत में विश्वविद्यालय के भीतर चल रहे प्रशासनिक कामकाज में बड़े पैमाने पर वित्तीय और व्यवस्थागत गड़बड़ियों के गंभीर आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ता ने विश्वविद्यालय की पारदर्शिता और सुचारू संचालन को बचाने के लिए अधिनियम की धारा 52 लागू करने तथा कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की थी, जिसे संज्ञान में लेते हुए राजभवन ने यह बड़ा कदम उठाया है।

अब उच्च शिक्षा विभाग के अगले एक्शन और जांच कमेटी पर टिकी निगाहें

राजभवन द्वारा मूल शिकायत पत्र को संलग्न करते हुए उच्च शिक्षा विभाग को अग्रसारित किए जाने के बाद से यूनिवर्सिटी प्रशासन की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद अब पूरे प्रदेश के शिक्षाविदों और कर्मचारियों की निगाहें उच्च शिक्षा विभाग के अगले कदमों पर टिकी हुई हैं कि कब तक एक निष्पक्ष जांच कमेटी का गठन किया जाता है और इन गंभीर आरोपों पर क्या वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाती है।