मुंबई। पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के उपरांत मुंबई स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क में शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उत्सव मनाया। इस दौरान आयोजित 'तिरंगा विजय रैली' को संबोधित करते हुए शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने विवादित बयान दे डाला। उन्होंने नीट प्रश्नपत्र लीक के विरुद्ध आवाज उठाने वाले विद्यार्थियों की प्रशंसा करते हुए उनकी तुलना 'विष्णु के अवतार' से कर दी। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं ने सरकार को आईना दिखाया है, वे अवतारी स्वरूप हैं और यह आंदोलन अंधभक्तों के विरुद्ध देशभक्तों की निर्णायक विजय है। ठाकरे ने दावा किया कि छात्रों का यह राष्ट्रव्यापी विरोध सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध एक विस्तृत राजनीतिक संघर्ष का आरंभ है।
चुनावी प्रक्रिया पर प्रहार और श्रद्धांजलि सभा
अपने संबोधन में ठाकरे ने चुनावी व्यवस्था पर निशाना साधते हुए कहा कि इस प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मतों की चोरी तो संभव है, परंतु जनभावनाओं को नहीं चुराया जा सकता। वहीं दूसरी ओर, उनके चचेरे भाई एवं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने परीक्षा विवाद के कारण कथित रूप से आत्महत्या करने वाले 21 अभ्यर्थियों की स्मृति में एक मिनट का मौन रखकर अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं।
युवाओं से आंदोलन निरंतर जारी रखने का आह्वान
उद्धव ठाकरे ने विद्यार्थियों की एकजुटता की सराहना करते हुए कहा कि युवाओं ने देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है। आंदोलन के व्यापक स्वरूप का उल्लेख करते हुए उन्होंने उपस्थित जनसमूह और युवाओं से अपील की कि वे इस चेतना को धीमा न पड़ने दें। उन्होंने कहा कि सत्ता के अहंकार को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए और युवाओं को अपने हक की यह लड़ाई लगातार जारी रखनी होगी।

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