मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में आवास एवं विकास परिषद द्वारा अवैध निर्माणों के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक ध्वस्तीकरण (मलबे में तब्दील करने के) अभियान ने सेंट्रल मार्केट और उसके आस-पास के व्यापारिक अंचलों में भारी बेचैनी और हड़कंप मचा दिया है। बीते दो दिनों के भीतर प्रशासन द्वारा 30 से अधिक व्यावसायिक व आवासीय भवनों पर की गई सख्त कानूनी कार्रवाई के बाद हताश दुकानदार और मकान मालिक अब किसी बड़े नुकसान से बचने के लिए स्वयं ही अपने अनाधिकृत निर्माणों को हटाने में जुट गए हैं। दूसरी ओर, इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध कर रही स्थानीय महिलाओं ने रविवार से धरनास्थल पर सात दिवसीय सुंदरकांड पाठ की शुरुआत कर दी है और मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
अवकाश के दिन भी गर्जा सरकारी अमला, व्यापारियों में बढ़ी हलचल
शनिवार से शुरू हुई परिषद की यह बड़ी कार्रवाई रविवार को साप्ताहिक अवकाश होने के बावजूद बिना रुके जारी रही। निर्धारित सेट बैक (सड़क से तय दूरी) के लिए जगह छोड़ने और अवैध रूप से संचालित हो रही दुकानों को जमींदोज करने की इस मुहिम से समूचे व्यापारिक समुदाय में घोर चिंता और अनिश्चितता का माहौल है। दिनभर कई बड़े कारोबारी मौके पर पहुंचकर प्रशासनिक गतिविधियों का जायजा लेते रहे, वहीं राहत की उम्मीद लगाए बैठे प्रभावित लोगों की नजरें अधिकारियों और शासन के अंतिम निर्णयों पर टिकी रहीं।
इस कार्रवाई के सीधे प्रभाव के चलते कई दुकानदारों ने प्रशासनिक टीम के पहुंचने से पहले ही खुद हथौड़े उठा लिए हैं। अनेक प्रमुख स्थानों पर लोग स्वेच्छा से अपनी बाहरी दीवारें ढहा रहे हैं और भविष्य की कार्रवाई से बचने के लिए अब निर्धारित दूरी को ध्यान में रखते हुए भीतर की ओर नया निर्माण कर रहे हैं।
दिन-रात चल रहा अवैध निर्माण हटाने का काम, हटाए जा रहे शटर
आवास एवं विकास परिषद कार्यालय से क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर इस समय अजीब सा नजारा है; यहाँ मकान मालिकों ने स्वयं ही अपने अवैध निर्माणों को ढहाना शुरू कर दिया है। रात-दिन मजदूरों की मदद से ड्रिल मशीन, छेनी और भारी हथौड़ों के जरिए पक्के ढांचों को तोड़ा जा रहा है।
प्रशासनिक सख्ती को देखते हुए कई मकानों के भूतल (ग्राउंड फ्लोर) पर बनी दुकानों के लोहे के शटर रातों-रात हटाकर उनकी जगह दोबारा पक्की दीवारें, खिड़कियां और रिहायशी दरवाजे लगाए जा रहे हैं। जो व्यापारी अब तक इस अभियान को हल्के में ले रहे थे, उन्होंने भी आनन-फानन में अपनी दुकानें बंद कर कीमती सामान सुरक्षित स्थानों पर समेटना शुरू कर दिया है। कई बड़े शोरूम के सामने की शानदार बाहरी सजावट और फ्रंट एलिवेशन को भी हटा लिया गया है।
73 दिनों से जारी है धरना, पुलिस ने हटवाया तंबू तो महिलाओं ने शुरू किया सुंदरकांड
सेंट्रल मार्केट में सेट बैक छोड़ने के कड़े नियमों के विरोध में पिछले 73 दिनों से धरने पर बैठी महिलाओं का आंदोलन अब धार्मिक रूप ले चुका है। रविवार को जब पुलिस प्रशासन ने सुबह धरनास्थल पर लगाया जा रहा तंबू जबरन हटवा दिया, तो महिलाओं ने वहीं जमीन पर राम दरबार सजाकर और बजरंग बली का विशेष श्रृंगार कर घरों व आजीविका को बचाने के लिए सुंदरकांड का पाठ शुरू कर दिया। इसके साथ ही सेक्टर-3 और 4 के चौराहे के पास स्थित गोल मंदिर क्षेत्र में महिलाओं ने सामूहिक सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन कर अपना शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया।
27 जून तक चलेगा धार्मिक अनुष्ठान, बड़े आंदोलन की चेतावनी
आंदोलन का नेतृत्व कर रही महिलाओं का कहना है कि वे पिछले ढाई महीने से अधिक समय से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को लेकर बैठी हैं, परंतु अब तक किसी भी स्थानीय जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी ने उनकी सुध नहीं ली और न ही कोई ठोस आश्वासन दिया है।
महिलाओं ने दोटूक शब्दों में घोषणा की है कि आगामी 27 जून तक धरनास्थल पर प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ और भजन-कीर्तन किया जाएगा। यदि इस धार्मिक अनुष्ठान की अवधि के भीतर प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक या सहानुभूतिपूर्ण निर्णय नहीं लिया गया, तो इस आंदोलन को और अधिक व्यापक व आक्रामक रूप दिया जाएगा। रविवार को अनुष्ठान की समाप्ति के बाद बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया, जहाँ सभी ने एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

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