स्कूल निरीक्षण को पहुंचे SDM, बच्चों संग जमीन पर बैठकर किया मिड-डे मील का स्वाद

गया: गया जिले के टिकारी प्रखंड के अंतर्गत सिमुआरा स्थित मध्य विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने कुछ दिनों पूर्व विद्यालय की बदहाल व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया था। स्थानीय स्तर पर सक्रिय युवाओं के नेतृत्व में करीब 40 से अधिक छात्र-छात्राओं ने अनुमंडल पदाधिकारी कार्यालय के समक्ष पहुंचकर मिड-डे मील की खराब गुणवत्ता, पेयजल संकट, शौचालयों की दयनीय स्थिति और अन्य समस्याओं के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की थी। छात्रों के इस मुखर विरोध के बाद प्रशासनिक तंत्र हरकत में आया और व्यवस्था सुधारने की दिशा में कदम उठाए गए।

एसडीएम ने किया औचक निरीक्षण और चखा भोजन

छात्रों के प्रदर्शन और शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए शुक्रवार की सुबह एसडीएम कुंदन प्रवीण ने सिमुआरा मध्य विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ प्रखंड विकास अधिकारी, पंचायत के मुखिया और शिक्षा विभाग के कई प्रमुख अधिकारी भी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान एसडीएम ने बच्चों के बीच जमीन पर बैठकर मिड-डे मील का भोजन खाया और उसकी गुणवत्ता तथा स्वाद की स्वयं बारीक जांच की, ताकि छात्रों को मिलने वाले आहार की असल स्थिति का पता चल सके।

भोजन की गुणवत्ता में सुधार और सख्त निर्देश

निरीक्षण के दौरान छात्रों ने अधिकारियों को बताया कि विरोध प्रदर्शन के बाद से भोजन की गुणवत्ता में पहले की अपेक्षा सुधार देखने को मिला है। इस पर एसडीएम ने स्पष्ट किया कि बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से कोई समझौता नहीं किया जाएगा तथा गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके अलावा उन्होंने स्कूल के शौचालयों, पेयजल व्यवस्था और साफ-सफाई का जायजा लेते हुए प्रधानाध्यापक को शनिवार तक सभी कमियों को पूरी तरह दूर करने का कड़ा निर्देश दिया और चेतावनी दी कि ऐसा न होने पर दोषियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

प्रशासनिक सक्रियता पर ग्रामीणों और छात्रों की प्रतिक्रिया

प्रशासन की इस त्वरित और जमीनी कार्रवाई का छात्रों, अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों ने स्वागत किया है। लोगों का मानना है कि छात्रों द्वारा उठाई गई जायज मांगों ने प्रशासनिक अमले को सक्रिय करने का काम किया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन इसी तरह निगरानी बनाए रखे और कमियों का स्थायी समाधान हो जाए, तो सरकारी विद्यालयों में पठन-पाठन और सुविधाओं का माहौल पूरी तरह से सुधर जाएगा।