पीएम मोदी की अपील के बाद चिदंबरम का सवाल, ‘क्या BJP के ट्रोल्स को भी माफ किया?’

नई दिल्ली| कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर तीखा सवाल उठाया है जिसमें उन्होंने युवाओं को माफ करने की अपील की थी। चिदंबरम ने सोशल मीडिया के जरिए प्रधानमंत्री से मुखातिब होते हुए पूछा कि क्या उन्होंने उन भाजपा समर्थित "ट्रोल्स" को भी पूरी तरह माफ कर दिया है जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सरकार की आलोचना करने वाले नागरिकों के खिलाफ लगातार अभद्र, आपत्तिजनक और अश्लील टिप्पणियां करते रहते हैं।

सोशल मीडिया पर चिदंबरम का तीखा सवाल

कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा, "क्या माननीय प्रधानमंत्री ने एक्स पर सरकार की नीतियों की आलोचना करने वाली पोस्ट्स पर बेहद भद्दी और अश्लील टिप्पणियां करने वाले भाजपा के इन ट्रोल्स को भी माफ कर दिया है?" उनकी यह तीखी टिप्पणी इन दिनों सार्वजनिक राजनीतिक विमर्श की भाषा, शालीनता और सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहे अपशब्दों को लेकर देश भर में चल रही तीखी बहस के बीच सामने आई है।

पीएम मोदी ने अपने वीडियो संदेश में क्या कहा था?

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो संदेश साझा किया था, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान कुछ युवाओं द्वारा इस्तेमाल की गई बेहद आपत्तिजनक भाषा का जिक्र किया था। उन्होंने दर्द बयां करते हुए कहा था कि इस विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें खुद और उनकी दिवंगत माताजी को भी सार्वजनिक रूप से अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा था।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा था, "जंतर-मंतर पर जो कुछ भी हुआ, उसे पूरे देश और दुनिया ने देखा है। कुछ शरारती युवाओं द्वारा जिस तरह की भद्दी और अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, वह किसी भी सभ्य समाज के दायरे में स्वीकार्य नहीं है। मुझे व्यक्तिगत स्तर पर गालियां दी गईं और मेरी दिवंगत मां के बारे में भी अपमानजनक बातें कही गईं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था।"

युवाओं को क्षमा करने और सुधारने की अपील

हालांकि, इस अप्रिय घटना के बावजूद प्रधानमंत्री ने बड़ा दिल दिखाते हुए समाज से एक अपील की थी। उन्होंने कहा था कि बचपन और कच्ची उम्र में युवाओं से गलतियां हो जाती हैं, और यही वह आयु होती है जब इंसान अपनी गलतियों से सबसे ज्यादा सीखता है। समाज में इस तरह की अमर्यादित भाषा के प्रयोग को लेकर जो भारी आक्रोश है, उसे वह भली-भांति समझते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि विशेषकर हमारी युवा बेटियों के मुंह से इस तरह के शब्द सुनना सांस्कृतिक रूप से बेहद झकझोरने वाला है, लेकिन अब समय आ गया है कि उन्हें दण्डित करने के बजाय अपनाया जाए और सही रास्ता दिखाया जाए।

पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा था, "मैं उन बच्चों को माफ करना चाहता हूं। हमारे समाज को भी मेरी इस भावना को खुले मन से स्वीकार करना चाहिए। जिस प्रकार कई बार हमारी अपनी ही जीभ दांतों के बीच आ जाती है और खून निकल आता है, लेकिन इसके बावजूद हम अपने दांत नहीं तोड़ फेंकते—क्योंकि दांत भी हमारे अपने हैं और जीभ भी हमारी ही है। ठीक उसी तरह, ये युवा भी हमारे अपने ही बच्चे हैं। इन्हें सुधारना और सही मार्ग दिखाना हमारा मुख्य कर्तव्य है।" उन्होंने माना कि भटके हुए लोगों को रास्ते पर लाना कठिन जरूर है, लेकिन समाज को यह जिम्मेदारी उठानी ही होगी।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद दर्ज हुई थी एफआईआर

प्रधानमंत्री की यह शालीन और क्षमादान वाली टिप्पणी उस घटनाक्रम के तुरंत बाद आई थी, जिसमें नोएडा पुलिस ने 'नीट' (NEET) पेपर लीक के मुद्दे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और अमर्यादित टिप्पणियां करने के आरोप में एक युवती के विरुद्ध औपचारिक एफआईआर दर्ज की थी।

इस बीच, नीट परीक्षा पेपर लीक के देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से अपना इस्तीफा दे दिया है। दूसरी ओर, देश की संसद ने गत गुरुवार को ही प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घिनौनी और आपराधिक गतिविधियों को कड़ाई से रोकने के लिए कानूनी ढांचे को बेहद सख्त बनाने वाला 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' भारी बहुमत से पारित कर दिया है।